शुक्रवार को नामांकन लेने का आखिरी दिन था लेकिन किसी भी कैंडिडेट के नाम वापस नहीं। इससे मुकाबला भी दिलचस्प हो गया है। दोनों पक्ष अब अपनों को मनाने में और निर्दलीय को साधने में लगे है। यह देखना दिलचस्प होगा कि किसका दाव सही बैठेगा..

जयपुर. राजस्थान में राज्यसभा की चार सीटों पर हो रहे चुनाव का काउंटडाउन शुरू हो गया है। 3 जून शुक्रवार को नामांकन वापसी का आखिरी दिन था लेकिन किसी भी प्रत्याशी ने अपना नाम वापस नहीं लिया है, जिससे इस मुकाबले की तस्वीर पूरी तरह से साफ़ हो गई है कि इन चार सीटों में होने वाले चुनाव में कोई भी कैंडिडेट पीछे नहीं हट रहा है। अब इन सीटों पर पांच प्रत्याशियों के चुनाव मैदान में बने रहने से यह मुकाबला दिलचस्प हो गया है।

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दोनो खेमों के लिए हर पल भारी
नामांकन वापस लेने की तारीख निकलने के बाद अब राज्यसभा चुनाव की तारीख नज़दीक आने के साथ ही कांग्रेस और भाजपा खेमों में हर एक दिन और हर एक पल भारी पड़ता दिख रहा है। राज्यसभा चुनाव 10 जून को होना है। इस तारीख से पहले दोनों ही दल अपने-अपने विधायकों की बाड़ाबंदी पर तो फोकस कर ही रहे हैं, बल्कि अन्य राजनितिक दलों और निर्दलीय विधायकों को भी साधने की कोशिशों में जुटे हुए हैं।
 ताकि कंफर्म सीट को सुनिश्चित कर सके साथ ही जिन सीटों पर दावा किया जा रहा है उनको भी जीतने की कोशिश की जा सके।

भाजपा ने लगाया जासूसी का आरोप

मिशन राज्यसभा चुनाव के मद्देनज़र कांग्रेस और समर्थित विधायकों ने अपने विधायकों की संख्या को चुनाव से पहले बनाए रखने के लिए उदयपुर में बाड़ाबंदी चल रही है। इस बीच भाजपा नेताओं ने कांग्रेस पार्टी पर सरकारी तंत्र की मदद से उनकी जासूसी करने का आरोप लगाया है। भाजपा विधायक मदन दिलावर ने शुक्रवार को जयपुर स्थित आवास की पुलिस निगरानी पर सवाल उठाए। दिलावर ने कहा कि उनके सहित कई विधायकों की पुलिस ने जासूसी करना शुरू कर दिया है। दिलावर के इस बात पर पुलिसकर्मियों से उलझते हुए का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है।

पुलिस निगरानी पर भाजपा प्रदेशाध्यक्ष के ये बोल
डॉ सतीश पूनिया ने भी विधायकों की पुलिस निगरानी बढ़ाए जाने को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने विधायक दिलावर के पुलिस से उलझते हुए का एक वीडियो साझा करते हुए लिखा, 'ये देखिए सरकार की तानाशाही और राज्य सभा में आसन्न हार की बौखलाहट। अब सुरक्षा के नाम पर विधायकों की जासूसी और घेराबंदी। प्रलोभन, आवंटन, पुरानी फ़ाइल, उपकार, उपहार और जाने क्या क्या? चुनाव परिणाम कुछ भी हों, लेकिन आपकी नैतिक पराजय हो चुकी मुख्यमंत्री जी।''

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निर्दलीय या नाराज कांग्रेस विधायकों को अपने तरफ कर पाएगी भाजपा
राज्यसभा चुनाव की चार में से एक सीट पर भाजपा की सबसे बड़ी चुनौती समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी की सीट निकालने की है। भाजपा के पास अभी जितने विधायकों की संख्या है, उसके हिसाब से सपोर्टिंग कैंडिडेट को जीत दिलाने के लिए 11 और वोटों की जरूरत है। इन वोटों की कमी को अन्य दलों या निर्दलीय विधायकों के साथ ही वह कांग्रेस पार्टी के नाराज़ चल रहे विधायकों में सेंधमारी करके ही पूरा कर सकती है, इसके अलावा कोई और तरीका नहीं है जिससे की सपोर्टिंग कैंडिडेट को जिताया जा सके। अब ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि क्या भाजपा इस चुनौती को पार करने के लिए उसके ''चुनावी रणनीतिकारों'' की मदद लेकर समर्थित प्रत्याशी को भी जीत का सहरा पहना पाएगी?

चौथी सीट पर जीत कंफर्म भाजपा प्रदेशाध्यक्ष
बीजेपी समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी डॉ सुभाष चंद्रा के लिए चौथी सीट निकाल पाने में भले ही भाजपा को पसीना आ सकता है, लेकिन खुद प्रत्याशी डॉ चंद्रा और पार्टी के वरिष्ठ नेता जीत के प्रति श्योर दिखाई दे रहे हैं। समर्थित प्रत्याशी और भाजपा प्रदेशाध्यक्ष दावा कर रहे हैं कि अन्य दलों के साथ ही कई निर्दलीय विधायक उनके संपर्क में हैं जो उनके पक्ष में वोट करेंगे।

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