बच्चों की परवरिश में थोड़ी सी भी लापरवाही उन्हें गलत राह पर ले जा सकती है और यह खबर उसी की एक चौंकाने वाली मिसाल है। 13 साल के एक स्कूल छात्र की करतूत देखकर आप दंग रह जाएंगे। 

रिलेशनशिप डेस्क. एक नहीं दो नहीं...बल्कि तीन लड़कियों को उसने निशाना बनाया। अलग-अलग दिन और वक्त में उसने उनके साथ कुछ ऐसा किया जिसे जानकर कोई भी हैरान हो सकता है कि 13 साल के बच्चे का दिमाग किस तरह विकृत हो चुका है। आरोप साबित नहीं हुआ है, लेकिन पुलिस ने संदेह के आधार पर उसे गिरफ्तार कर लिया है। पूरा मामला इंग्लैंड के बर्कशायर से जुड़ा है। 

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बर्कशायर के ब्रैक्नेल में रहने वाले 13 साल के स्कूली छात्र पर आरोप है कि उसने तीन लड़कियों पर यौन हमला किया। उसने कथित तौर पर गली में घात लगाकर उनपर अटैक किया। घटना 5 और 6 जुलाई की है। द मिरर में छपी रिपोर्ट में टेम्स वैली पुलिस के एक प्रवक्ता ने बताया कि जांच के बाद लड़के को यौन उत्पीड़न के संदेह में गिरफ्तार किया गया है।

पहला शिकार 20 साल की महिला

आरोप है कि लड़के ने 20 साल की दो लड़कियों और एक नाबालिग लड़की पर सेक्स अटैक किया। पुलिस ने बताया कि 5 जुलाई (मंगलवार) को करीब 10.50 बजे एक नाबालिग ने 20 साल की महिला को साउथ हिल पार्क में गलत तरीके से टच किया। 

दूसरा शिकार और तीसरा शिकार भी गलत टच का शिकार

इसके बाद 6 जुलाई (बुधवार को) 7.30 बजे, नाबालिग साइकिल चलाते हुए 20 साल की दूसरी महिला को फिर से गलत तरीके से टच किया। इसी दिन 8.20 बजे उसने हिल पार्क में टीनेजर लड़की के कपड़े और शरीर को टच किया। तीनों ने अपनी शिकायत में बताया कि एक व्हाइट ब्यॉय ऐसा कर रहा है। जिसके बाद पुलिस ने लोगों से अपील की कि अगर कोई ऐसी घटना देखें या संदिग्ध के बारे में कोई जानकारी हो तो बताए। जिसके बाद लड़के को गिरफ्तार किया गया।

क्यों कम उम्र के बच्चे जा रहे हैं गलत राह पर? 

ये सिर्फ इंग्लैड से जुड़ा मामला नहीं है, बल्कि दुनिया के हर कोने में कई नाबालिग बच्चे गलत रास्ते पर जा रहे हैं। भारत में भी नाबालिग अपराध में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। मनोचिकित्सक की मानें तो आजकल नाबालिग समय से पहले ही वयस्क हो रहे हैं और उनकी मनोस्थिति बदल रही है। मोबाइल फोन पर ज्यादा वक्त बिताना, माता-पिता के पास बच्चों के लिए कम वक्त होना कई कारण हैं जो उनको अपराध की तरफ ढकेलते हैं। इतना ही नहीं, बच्चे जब शुरू में गलती करते हैं तो माता-पिता समाज के डर से उसे दबा देते हैं। जिसकी वजह से बच्चे का हौसला और बढ़ जाता है। जरूरी है कि उसे उसी वक्त सही राह दिखाया जाए। उसकी काउंसलिंग की जाए।

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