Chhath Puja Katha: उत्तर भारत में कईं त्योहार बहुत ही अलग हैं, छठ पूजा भी इनमें से एक है। ये त्योहार दिवाली के 5 दिन बाद मनाया जाता है। इस पर्व में सूर्यदेव और छठी मैया की पूजा की जाती है। 

Chhath Puja stories: इस बार छठ महापर्व 5 से 7 नवंबर तक मनाया जाएगा। वैसे तो छठ महापर्व पूरे देश में धूम-धाम से मनाया जाता है, लेकिन उत्तर भारत के कुछ राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड आदि में इसकी रौनक देखते ही बनती है। छठ पर्व का वर्णन रामायण और महाभारत में भी मिलता है। छठ पर्व क्यों मनाते हैं, इसे लेकर कईं कथाएं प्रचलित हैं। आगे जानिए इस पर्व से जुड़ी रोचक कथाएं…

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कैसे हुई छठ पूजा की शुरूआत? (How did Chhath Puja start?)

पुराणों के अनुसार, सतयुग में प्रियवद नाम के एक राजा थे। उनके राज्य में सभी बहुत खुशहाल थे। राजा प्रियवद की कोई संतान नहीं थी, इस कारण वे दुखी रहते थे। तब किसी महर्षि ने उन्हें पुत्र प्राप्ति के लिए विशेष यज्ञ करने की सलाह दी, जिसके प्रभाव से उन्हें एक पुत्र हुआ। लेकिन जन्म लेते ही वह मृत हो गया। राजा प्रियवद जब उसका अंतिम संस्कार करने श्मशान गए गए तो वहां षष्ठी देवी प्रकट हुई और उन्होंने मृत बालक को पुन: जीवित कर दिया। उस दिन कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि थी। तभी राजा प्रियवद ने उस तिथि पर षष्ठी देवी यानी छठी मैया की पूजा करने की शुरूआत की, ये परंपरा आज भी चली आ रही है।

श्रीराम-सीता ने भी सूर्यदेव की पूजा

वाल्मीकि रामायण में भी भगवान श्रीराम और देवी सीता द्वारा छठ पूजा का वर्णन मिलता है। उसके अनुसार, रावण का वध करने के बाद जब भगवान श्रीराम अयोध्या आए और राज-पाठ संभाला तो कार्तिक शुक्ल षष्ठी तिथि पर उन्होंने अपनी पत्नी सहित छठी मैया और सूर्यदेव की विधि-विधान से पूजा की।

द्रौपदी ने भी की थी सूर्य पूजा

प्रचलित कथा के अनुसार, द्वापर युग में पांडवों ने भी छठ पूजा की थी। वनवास के दौरान पांडव जिस बर्तन (अक्षय पात्र) से भोजन प्राप्त करते थे, वह भी सूर्यदेव ने ही उन्हें दिया था। द्वापर युग में सूर्यदेव की पूजा के और भी कईं प्रसंग पढ़ने को मिलते हैं, जो बताते हैं कि इस युग में भी छठ पूजा की जाती थी।


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इस आर्टिकल में जो भी जानकारी दी गई है, वो ज्योतिषियों, पंचांग, धर्म ग्रंथों और मान्यताओं पर आधारित हैं। इन जानकारियों को आप तक पहुंचाने का हम सिर्फ एक माध्यम हैं। यूजर्स से निवेदन है कि वो इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।