Interesting facts about Mahabharata: महाभारत युद्ध के दौरान महाबली भीम में दुर्योधन के छोटे भाई दु:शासन की छाती फाड़कर उसका खून पीया था, ये बात तो हम सभी जानते हैं, लेकिन इस बात में कितनी सच्चाई है, इसके बारे में कम ही लोगों को पता है। 

Unheard stories of Mahabharata: महाभारत की कथा कितनी रोचक है उतनी ही रहस्ययमी भी है। महाभारत में कईं ऐसी घटनाएं भी हुई हैं जिनके बारे में जानकर लोगों के मन में भय पैदा हो जाता है। ऐसी ही एक घटना युद्ध के दौरान हुई, जब महाबली भीम ने दुर्योधन के छोटे भाई दु:शासन की छाती फाड़कर उसका खून पीया और उसी खून से द्रौपदी के बालों को धोया। ये घटना कब और कैसे हुई आगे जानिए…

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भीम ने ली थी कठोर प्रतिज्ञा
जब युधिष्ठिर जुएं में अपना राज-पाठ और अपने भाइयों को हार गए तो इसके बाद उन्होंने द्रौपदी को भी दांव पर लगा दिया। शकुनि ने दुर्योधन की ओर से खेलते हुए छल से द्रौपदी को भी जीत लिया। तब दुर्योधन ने अपने छोटे भाई दु:शासन से द्रौपदी को सभा में लाने को कहा। दु:शासन द्रौपदी के बाल पकड़कर सभा में ले आया। द्रौपदी का इस तरह अपमान होते हुए देख भीम ने प्रतिज्ञा ली कि युद्ध में वो दु:शासन की छाती फाड़कर उसका खून पीएंगे। भीम की प्रतिज्ञा सुनकर वहां बैठे सभी लोग डर गए थे।

भीम ने कैसे पूरी की अपनी प्रतिज्ञा?
युद्ध के दौरान जब कर्ण कौरवों का सेनापति थे। उस समय भीम और दु:शासन के बीच भयानक युद्ध हुआ। इस युद्ध में भीमसेन ने पहले दु:शासन का एक हाथ उखाड़ दिया और इसके बाद उसकी छाती फाड़कर उसका खून पीने लगे, जिसमें ये भी दृश्य देखा वो डरकर वहां से भागने लगे। दु:शासन का खून पीकर भीम ने कहा ‘मैंने बचपन से दूध, घी, दही और मक्खन आदि कईं रस पीएं हैं, लेकिन जो स्वाद शत्रु के रक्त में है, वो किसी और में नहीं।’ भीम को ऐसा कहते देख कुछ लोग तो ये भी कहने लगे ‘भीम मनुष्य नहीं बल्कि राक्षस है।’

क्या भीम ने सचमुच पीया था दु:शासन का खून?
महाभारत के अनुसार, युद्ध जीतने के बाद जब पांडव हस्तिनापुर गए तो वहां पहले राजा धृतराष्ट्र ने भीम को मारने की कोशिश की, जिसे भगवान श्रीकृष्ण ने विफल कर दिया। इसके बाद जब पांडव माता गांधारी से मिलने गए तो जैसे गांधारी की नजर युधिष्ठिर के पैरों पर पड़ी, उनके नाखून काले पड़ गए। ये देखकर पांडव डर गए। तब श्रीकृष्ण के समझाने पर गांधारी का क्रोध शांत हुआ। गांधारी ने पूछा कि ‘क्या युद्ध में भीम द्वारा दु:शासन का खून पीना सही था?’ तब भीम ने बताया कि ‘मैंने दु:शासन का खून नहीं पीया, उसका खून मेरे दांतों से आगे नहीं गया।’


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इस आर्टिकल में जो भी जानकारी दी गई है, वो ज्योतिषियों, पंचांग, धर्म ग्रंथों और मान्यताओं पर आधारित हैं। इन जानकारियों को आप तक पहुंचाने का हम सिर्फ एक माध्यम हैं। यूजर्स से निवेदन है कि वो इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।