क्रिकेट के मैदान में जितनी तेजी से किसी कमजोर टीम के विकेट नहीं गिरते होंगे उससे ज्यादा तेजी से बिहार में पुल गिर रहे हैं।

बिहार में गिरा पुल। क्रिकेट के मैदान में जितनी तेजी से किसी कमजोर टीम के विकेट नहीं गिरते होंगे उससे ज्यादा तेजी से बिहार में पुल गिर रहे हैं। बिहार जो अपने सुनहरे इतिहास के लिए विश्व प्रसिद्ध है। हालांकि, आज के वक्त में आलम ये है कि बिहार में भ्रष्टाचार कोने-कोने में भर गई है। यही वजह है कि बीते कई सालों से आए दिन पुल गिरने की घटना में तेजी देखी गई है। इस हफ्ते की ही बात करें तो बीते 5 दिनों में 3 पुल ताश के पत्तों की तरह ढह गए हैं। पहला पुल 18 जून को अररिया जिले सिकटी प्रखंड में बकरा नदी पर गिरा, जो उद्घाटन के पहले ही नदी में समा गई। दूसरा पुल शनिवार (21 जून) को सिवान के महाराजगंज अनुमंडल के पटेढ़ा और गरौली गांव के बीच गिर गया। तीसरा पुल बिहार के मोतिहारी जिले में घोड़ासहन इलाके में धाराशायी हो गया। इस पुल का निर्माण अमावा से चैनपुर स्टेशन जाने वाली सड़क को जोड़ने के लिए किया जा रहा था।

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बिहार में दो सालों में गिरे पुल के आंकड़े

भागलपुर के सुल्तानगंज से खगड़िया के अगुवानी गंगा घाट पर बन रहे पुल के पिलर नंबर 10, 11 और 12 अचानक 4 जून 2023 को

गिरकर नदी में बह गए थे। इस पुल का निर्माण 1710 करोड़ रुपए की लागत से हो रहा था। इसे फोरलेन बनाया जा रहा था।

बिहार के सारण जिले में 19 मार्च 2023 को एक पुल गिर गया। इसके गिरने से दो लोग घायल हुए थे। ये अंग्रेजों के जमाने का पुल था।

बिहार के पटना जिले में बिहटा-सरमेरा फोरलेन पुल 19 फरवरी 2023 को गिर गया। पटना को नालंदा जिले से जोड़ने वाली सड़क आंशिक रूप से बनी थी।

बिहार के दरभंगा जिले में ओवरलोड ट्रक की चपेट में आने से 16 जनवरी 2023 को लोहे का पुल गिर गया था। ये पुल दरभंगा को मधुबनी, सहरसा और समस्तीपुर जिलों से जोड़ता था।

बिहार के पूर्णिया जिले में 15 मई 2023 को बड़ा हादसा हो गया था। यहां ढलाई के दौरान एक बॉक्स ब्रिज गिर पड़ा था।

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