दिल्ली सरकार और उपराज्यपाल के बीच विवाद के कारण 'फरिश्ते दिल्ली के' स्कीम का फंड रुका हुआ था। सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद फंड जारी किया गया और कोर्ट ने दोनों पक्षों को फटकार लगाई।

SC on Delhi Govt Vs LG: दिल्ली सरकार और उप राज्यपाल के बीच विवाद से कई महत्वपूर्ण स्कीम्स का बुरा हाल है। सड़क एक्सीडेंट्स पीड़ितों के लिए बनायी गई योजना का फंड नहीं जारी किए जाने पर सुप्रीम कोर्ट का डंडा चलते ही सारे बिल्स क्लियर कर दिए गए। दिल्ली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में इस महत्वपूर्ण स्कीम का फंड रोकने का आरोप एलजी और सरकारी अधिकारियों पर लगाया था। हालांकि, कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद सरकार ने इस बार सुनवाई में बताया कि फंड रिलीज हो चुके हैं। सुप्रीम कोर्ट ने सख्त तौर पर दोनों पक्षों को हिदायद दी है कि सभी प्रकार के विवाद खत्म करें और हमेशा के लिए यह खत्म होना चाहिए। इन विवादों का जनकल्याणकारी योजनाओं पर असर नहीं होना चाहिए।

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कौन सी स्कीम का रूका था फंड?

दिल्ली सरकार ने शहर के अस्पतालों में रोड एक्सीडेंट्स पीड़ितों के फ्री इलाज के लिए "फरिश्ते दिल्ली के" स्कीम का शुभारंभ किया था। इस स्कीम के तहत निजी अस्पतालों में भी रोड एक्सीडेंट्स के पीड़ितों को फ्री इलाज कराने की सुविधा थी। इस योजना के तहत एक्सीडेंट वाले लोगों को बिना देर किए किसी भी अस्पताल में तत्काल इलाज की सुविधा मिल जाती थी। इसके सारे बिल सरकार द्वारा वहन किया जाता था। यह योजना लोगों को सड़क दुर्घटना पीड़ितों को बचाने और उनकी जान बचाने के लिए प्रोत्साहित करती है।

पेंडिंग बिल को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सरकार

लेकिन दिल्ली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाई थी कि दिल्ली एलजी और सरकारी अधिकारी, स्कीम के फंड्स को जारी नहीं कर रहे जिससे स्कीम के तहत बिल्स भुगतान में देरी हो रही है। गुरुवार को कोर्ट दिल्ली सरकार की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस केवी विश्वनाथन ने मामले की सुनवाई की। इसमें पेंडिंग बिलों का भुगतान, निजी अस्पतालों को पेमेंट करने, जानबूझकर स्कीम को बंद करने की योजना बना रहे जिम्मेदार अफसरों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई को लेकर सुनवाई हुई। दरअसल, दिसंबर 2023 में दिल्ली सरकार की योजना के लिए फंड रोकने का आरोप लगाने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के उपराज्यपाल (एलजी) व अन्य से जवाब मांगा था।

सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता शादान फरासत ने बताया कि दिसंबर 2023 में कोर्ट नोटिस के बाद फंड जारी कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार याचिका पर जोर नहीं देना चाहती।

कोर्ट ने दी नसीहत

एपेक्स कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि हमें यह समझ में नहीं आता कि सरकार का एक हिस्सा सरकार के दूसरे हिस्से से लड़ रहा है। कोर्ट ने कहा कि सरकार और उप राज्यपाल को अपने सारे डिस्प्यूट बिना देर किए साल्व करना चाहिए।

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