ये हैं हरियाणा के रेवाड़ी के रहने वाले मैकेनिकल इंजीनियर विकास यादव। इन्होंने एक अनूठी ई-साइकिल डिजाइन की है। इस साइकिल को बैटरी और पैडल दोनों से चलाया जा सकता है। इसकी स्पीड 30 किमी प्रति घंटा है। इसे तैयार करने में करीब 30 हजार रुपए की लागत आई।

रेवाड़ी. ये हैं हरियाणा के रेवाड़ी के रहने वाले मैकेनिकल इंजीनियर विकास यादव। रेवाड़ी शहर से सटे बालावास अहीर गांव के रहने वाले विकास यादव कोरोना काल में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अपने अनूठे ईजाद के कारण चर्चा में आए थे। अब उन्होंने एक अनूठी ई-साइकिल डिजाइन की है। इस साइकिल को बैटरी और पैडल दोनों से चलाया जा सकता है। इसकी स्पीड 30 किमी प्रति घंटा है। इसे तैयार करने में करीब 30 हजार रुपए की लागत आई।

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इनोवेटिव आइडिया-रेवाड़ी के विकास यादव की ई-साइकिल, एक बार चार्ज करने पर 50 किमी सफर

करीब 6 साल ऑटो मोबाइल सेक्टर में जॉब कर चुके विकास यादव की यह ई-साइकिल एक बार बैटरी चार्ज करने पर 50 किमी तक चल सकती है। सबसे बड़ी बात, इसकी दूरी साइकिलिंग करने वाले के वजन पर निर्भर है। 60 किलो वजन का व्यक्ति अगर इस चलाएगा, तो वो एक बार बैटरी चार्ज करने पर 50 किमी चलेगी। कम वजन के व्यक्ति के चलाने पर यह दूरी अधिक हो सकती है।

रेवाड़ी के विकास यादव की ई-साइकिल की खूबी

विकास ने नौकरी छोड़कर डेढ़ साल पहले ही अपना स्टार्टअप शुरू किया है। वे इलेक्ट्रोनिक्स व्हीकल्स डिजाइन कर रहे हैं। वे कार्गो, डिलीवरी व्हीकल बना चुके हैं। इस ई-साइकिल का प्रोजेक्ट भी डेढ़ साल पहले शुरू किया गया था। इसमें डिस्प्ले मीटर, हेड लाइट, ब्रेक लाइट सबकुछ है। सामान रखने के लिए पीछे कैरियर लगा है। इस साइकिल का वजन 11 किलो है। इसके निर्माण में एल्युमिनियम का इस्तेमाल किया गया है।

विकास अब तक 23 ई-साइकिल बना चुके हैं। इसकी बैटरी ढाई घंटे में फुल चार्ज हो जाती है। इसमें कुछ अन्य फीचर्स भी जोड़े जा रहे हैं।

जुगाड़ से ई रिक्शा तैयार कर चुके हैं रेवाड़ी के विकास यादव

विकास यादव इससे पहले ई-रिक्शा भी डिजाइन कर चुके हैं। कोरोनाकाल के दौरान जब उनकी जॉब जाती रही, तब उन्होंने अपनी क्रियेटिविटी पर फोकस किया था। पिछले साल विकास यादव अपने डिजाइन किए ई-रिक्शा के साथ नजर आए थे।

 इस ई-रिक्शा की खासियत यह है कि इसके पैडल चलाते समय बैटरी चार्ज हो जाती है। बैटरी को सोलर सिस्टम से भी चार्ज किया जा सकता है। विकास यादव कोरोना काल से पहले एक निजी कंपनी में मैकेनिकल इंजीनियर थे। लेकिन फिर जॉब जाती रही।

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