55 वर्षीय धनंजय मूलरूप से मध्य प्रदेश के जबलपुर के रहने वाले हैं। इस वक्त वह नागपुर रहते हैं। वो 800 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर नागपुर से अयोध्या जा रहे हैं। प्रतिदिन 40 से 50 किलोमीटर पैदल चलते हैं। वह 22 जनवरी के पहले अयोध्या पहुंचना चाहते हैं।

अयोध्या/जबलपुर. 22 जनवरी को रामलला अपनी रामनगरी यानि अयोध्या में विराजमान हो जाएंगे। अपने आराध्य के दर्शन और उनकी प्राण प्रतिष्ठा के लिए लाखों लोग अयोध्या जाने के लिए निकल गए हैं। कोई साइकिल चलाकर जा रहा है तो कोई पैदल ही निकल पड़ा है। ऐसे ही एक भक्त हैं कार सेवक धनंजय उर्फ राजू पाटमासे जो 800 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर नागपुर से अयोध्या जा रहे हैं।

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सालों का सपना होने जा रहा है साकार

दरअसल, 55 वर्षीय धनंजय मूलरूप से मध्य प्रदेश के जबलपुर के रहने वाले हैं। इस वक्त वह नागपुर पहुंच गए हैं। पैदल अपने प्रभू राम के दर्शन के लिए निकले धनंजय का नागपुर से लेकर जबलपुर तक रास्ते भर भव्य स्वागत किया गया। किसी ने उन्हें फूलों की माला पहनाई तो किसी ने राम नाम का गमछा भेंट किया। उनका कहना है कि 22 जनवरी उनके जीवन का सबसे यादगार दिन साबित होने वाला है। जिस दिन का सालों से इंतजार था वो पूरा होने जा रहा है। इस दिन हम सबके आराध्य श्रीराम अपने धाम यानि अयोध्या में विराजमान होंगे।

प्रतिदिन 40 से 50 किलोमीटर चलते हैं पैदल

धनंजय ने बताया कि वह रोजाना सुबह 5 बजे से पैदल चलना शुरू कर देते हैं। जो कि रात 9 और 10 बजे तक चलते रहते हैं। उनका कहना है कि वह प्रतिदिन 40 से 50 किलोमीटर पैदल चलते हैं। अब तक वो नागपुर से जबलपुर तक की करीब 350 किलोमीटर की दूरी तय कर चुके हैं। इस दूरी को तय करने में उन्हें एक सप्ताह लगा है। वह 22 जनवरी के पहले अयोध्या पहुंचना चाहते हैं। ताकि रामलला की प्राण प्रतिष्ठा में शामिल हो सकें।

10 दिनों तक बांदा जेल में भी रहा राम भक्त

धनंजय का कहना है कि यह दिन बड़े ही नसीब से उनकी जिंदगी में आया है। हम इस दिन का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। उन्होंने कहा कि मेरी इस राम यात्रा में परिवार ने भी उनका सहयोग किया। जिसके कारण वह अयोध्या के लिए निकले हैं। वह वैसे तो जबलपुर के निवासी हैं, लेकिन वर्तमान में वो नागपुर में परिवार के साथ रहते हैं। नागपुर में आकर वह होटल में काम करने लगे थे। उन्होंने बताया कि वो 1990 के दौर में ही राम मंदिर आंदोलन से जुड़े थे। वह यूपी की कल्याण सिंह की सरकार के समय में पुणे द्वारा अयोध्या पहुंचे थे। 1992 में गिरफ्तार करके करीब 10 दिनों तक बांदा जेल में रखा गया था। यानि वो एक कार सेवक हैं।