राजस्थान के सालासर धाम में संत मोहनदास जी का 230वां श्राद्ध धूमधाम से मनाया गया, जहाँ एक लाख से ज़्यादा श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। मान्यता है कि इस दिन प्रसाद खाने से पेट की बीमारियाँ दूर होती हैं।

चूरू. राजस्थान के चूरू जिले में सिद्धपीठ सालासर बालाजी के भक्त संत मोहनदास जी महाराज का 230वां श्राद्ध धूमधाम से मनाया गया। इसे विश्व का सबसे बड़ा श्राद्ध माना जा रहा है, जिसमें एक लाख से अधिक श्रद्धालु दूर-दूर से पहुंचे। यह कार्यक्रम सोमवार को आयोजित किया गया, और श्रद्धालुओं के लिए 51,000 किलो हलवा तैयार किया गया था।

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इस श्राद्ध का भोजन करने से दूर होती है यह बीमारी

संत मोहनदास जी के बारे में माना जाता है कि बालाजी महाराज ने उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर उन्हें दर्शन दिए। श्राद्ध के दिन प्रसाद ग्रहण करने से पेट की बीमारियों के ठीक होने की मान्यता है, जिसके चलते हर साल हजारों भक्त इस दिन सालासर में एकत्रित होते हैं। मंदिर के पुजारी अरविंद जी बताते हैं कि इस अवसर पर मंदिर परिसर में मेले जैसा माहौल रहता है, और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है।

बेहद खास होता है श्राद्ध का हलवा

श्राद्ध की तैयारियों का काम एक सप्ताह पहले से शुरू होता है। दो दर्जन हलवाई दो दिन पहले से हलवा बनाने में जुट जाते हैं। हलवा को बड़ी कड़ाही में तैयार किया जाता है और इसे सुष्वा व पंच मेला सब्जी के साथ श्रद्धालुओं को परोसा जाता है।

हनुमान जी ने दाढ़ी और मूंछ वाले रूप में दिए थे दर्शन

संत मोहनदास जी की भक्ति के बारे में कहा जाता है कि हनुमान जी ने उन्हें दाढ़ी और मूंछ वाले रूप में दर्शन दिए थे। उनकी तपस्या और भक्ति से प्रभावित होकर, हनुमान जी ने कहा था कि वे हमेशा इसी रूप में दर्शन देंगे। संत मोहनदास जी की भक्ति के चलते सालासर धाम में हनुमान जी की प्रतिमा स्थापित की गई थी, जो आज भी श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र है। इस प्रकार, चूरू में हुए इस विश्व के सबसे बड़े श्राद्ध ने धार्मिक आस्था और श्रद्धा को एक नई ऊंचाई पर पहुंचाया है।