राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की टेंशन बढ़ गई है और वह दिल्ली पहुंच गए हैं। क्योंकि राजस्थान में लाइट के लिए कोयला नहीं बचा है।  दिल्ली में उन्होंने केंद्रीय ऊर्जा मंत्री से मुलाकात कर इस समस्या का समाधान निकालने के लिए अपना पक्ष रखा है।

जयपुर. राजस्थान से बड़ी खबर है, दरअसल राजस्थान में आने वाले कुछ दिनों में बिजली गुल हो सकती है । राजस्थान की बिजली उत्पादन करने वाली इकाइयों में कोयले की कमी बढ़ती जा रही है। हालत यह हो रहे हैं कि अगर केंद्र दखल नहीं देगा तो आने वाले पास से 6 दिन बाद कई जिलों में बिजली कटौती शुरू करनी पड़ेगी । ऐसे में मुख्यमंत्री भजनलाल की टेंशन बढ़ गई है और वह दिल्ली पहुंच गए हैं। दिल्ली में उन्होंने केंद्रीय ऊर्जा मंत्री से मुलाकात कर इस समस्या का समाधान निकालने के लिए अपना पक्ष रखा है।

Add Asianetnews Hindi as a Preferred SourcegooglePreferred

लाइट के लिए 2 से 3 दिन का ही कोयला बचा

दरअसल राजस्थान में छोटी बड़ी मिलाकर 23 बिजली उत्पादन इकाइयां हैं। इनमें से 10 की हालत बेहद खराब है । इनमें दो से तीन दिन का ही कोयला बचा है । बाकी बची 13 बिजली उत्पादन इकाइयों में से करीब 6 बंद पड़ी है। उसके अलावा जो सात इकाइयां हैं , उनमें पहले ही अतिरिक्त भार चल रहा है । ऐसे में जल्द ही राजस्थान सरकार गांव में बिजली कटौती करने की प्लानिंग कर रही है। अगर केंद्र से कोई मदद नहीं मिलती है तो अगले महीने की पहली तारीख से बड़े स्तर पर बिजली कटौती राजस्थान में होना तय है।

छत्तीसगढ़ से कम रहा आ रहा कोयला

दरअसल छत्तीसगढ़ में कोयला खदानों में राजस्थान के हिस्से वाली कोयला खदान में से कोयले की आपूर्ति बेहद कम हो गई है। ऐसे में राजस्थान में बिजली उत्पादन में अवरोध हो रहा है। इसी के चलते कल रात मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और ऊर्जा मंत्री हीरालाल नगर दिल्ली रवाना हुए । आज दोपहर में उनकी मुलाकात दिल्ली में केंद्रीय कोयला मंत्री प्रहलाद जोशी और केंद्रीय ऊर्जा मंत्री आर के सिंह से हुई। राजस्थान के दोनों नेताओं ने अपना पक्ष रखा और कोयल का बंदोबस्त करने के लिए कहा।

4 से 5 घंटे गांवों में हो रही बिजली की कटौती

उल्लेखनीय है कि गहलोत सरकार में भी तीन बार बिजली आपूर्ति में बड़ी परेशानी आई थी।‌ ऐसे में कई गांवों में रात के समय बिजली सप्लाई बंद कर दी गई थी । शहरों में भी तीन से पांच घंटे की बिजली कटौती शुरू कर दी गई थी। साथ ही उद्योगों को भी तय घंटे में ही बिजली दी जा रही थी।