देश में 2 हजार के नोट बंद होने के बाद राजस्थान के सचिवालय के पास सरकारी बिल्डिंग में मिले 3 करोड़ रुपए का शॉकिंग खुलासा हो गया है। एसीबी और राजस्थान पुलिस की ज्वाइंट कार्रवाई करते हुए उस बिल्डिंग विभाग के ज्वाइंट डायरेक्टर को पकड़ लिया।

जयपुर (jaipur news). राजस्थान सरकार का शासन सचिवालय जहां पर मुख्यमंत्री, मंत्री, सीनियर आईएएस ऑफिसर बैठते हैं। उसके कुछ ही मीटर दूरी पर स्थित एक और सरकारी बिल्डिंग में करीब 3 करोड़ रुपए लावारिस मिलने का मामला आखिर खुल गया है। इस मामले में एंटी करप्शन ब्यूरो और जयपुर पुलिस ने मिलकर कार्रवाई की है और उसी विभाग के ज्वाइंट डायरेक्टर को पकड़ लिया है। उसे कुछ देर में कोर्ट में पेश करने की तैयारी की जा रही है और फिर उसे रिमांड पर लिया जाएगा। रिमांड पर लेने के बाद सबसे बड़ा और पहला सवाल यही होगा कि करीब 2 करोड़ 30 लाख रुपए कैश और 60 लाख रुपए का सोना आखिर किसने रिश्वत में दिया। बताया जा रहा है कि विभाग सीसीटीवी कैमरे लगाने का भी काम करता है और सीसीटीवी कैमरे लगाने के मामले में ही बड़ा खेल हो सकता है। फिलहाल ज्वाइंट डायरेक्टर को कोर्ट में पेश किया जा रहा है उसका नाम वेद प्रकाश है।

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सबसे पहले आपको बताते हैं 19 मई की रात क्या हुआ

दरअसल 19 मई को केंद्र सरकार ने 2 हजार रुपए के नोट बंद करने का ऐलान किया, उसी शाम को जयपुर में शासन सचिवालय के नजदीक स्थित योजना भवन नाम की एक बिल्डिंग मैं स्थित सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग यानी डीओआईटी भवन के बेसमेंट में से एक बंद अलमारी को तोड़ा गया। दरअसल डीओआईटी डिपार्टमेंट राजस्थान में सरकार का ऑनलाइन वर्क देखता है। डिपार्टमेंट के पास फिलहाल कई विभागों की फाइलों को ऑनलाइन करने का काम चल रहा है। कर्मचारियों ने बेसमेंट में रखी अलमारियों में से भी फाइलें निकाली ताकि उनको ऑनलाइन किया जा सके।

बंद अलमारी में मिला करोड़ों रुपए

लेकिन एक अलमारी जिसके लॉक लगा था, उसकी चाबी नहीं मिल सकी। बाद में इसे तोड़ना पड़ा। जिस समय इस अलमारी का लॉक तोड़ा गया उस समय डीओआईडी के ज्वाइंट डायरेक्टर वेद प्रकाश वहां पर नहीं थे। अलमारी का ताला तोड़ने के बाद उसमें से दो बैग निकले। जिनमें कुछ फाइलें दो करोड़ 31 लाख रुपए कैश और एक सोने की ईंट थी जिस पर स्विट्जरलैंड लिखा था। ईट का वजन करीब 1 किलो था। यह सोने की ईंट 60 लाख रुपए कि बताई गई है।

इतना पैसा मिलते ही मचा हड़कंप

इतना पैसा और सोना मिलने की सूचना जब अधिकारियों को दी गई तो तुरंत राजस्थान सरकार की चीफ सेक्रेटरी उषा शर्मा ने मीडिया बुला ली। डीजीपी राजस्थान उमेश मिश्रा, एडीजी क्राइम दिनेश एमएन और जयपुर पुलिस कमिश्नर आनंद श्रीवास्तव मौजूद रहे। 19 मई की रात 11:00 बजे मीडिया को यह जानकारी दी गई। उसके बाद इस सारे पैसे को सील कर दिया गया और काबिल अफसरों की टीम जांच पड़ताल में जुट गई।

सीसीटीवी में अलमारी में पैसे रखते दिया दिखाई

20 मई यानी कल सीसीटीवी फुटेज खंगालने के बाद पता चला कि अलमारी में एक व्यक्ति सामान रख रहा है । जांच पड़ताल की और जानकारी जुटाई गई तो पता चला कि यह व्यक्ति वेद प्रकाश है, जो ज्वाइंट डायरेक्टर है। तुरंत उसे हिरासत में लिया गया। उसके ऑफिस की तलाशी ली गई। झोटवाड़ा में स्थित उसके बंगले की तलाशी ली गई और देर शाम उसके खिलाफ पूरे सबूत तैयार करके सरकार को सूचना दी गई। सरकार ने तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए और आज जयपुर पुलिस ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की टीम के साथ मिलकर उसे गिरफ्तार कर लिया। उसे कोर्ट में पेश कर रिमांड पर लेने की तैयारी है।

अब सबसे बड़ा सवाल कि पैसा आया कहां से

प्रारंभिक जानकारी में यह पता लगा है कि हाल ही में राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने बजट पेश करने के दौरान यह कहा था कि पूरे राजस्थान में करीब तीन लाख से ज्यादा सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। सरकार के द्वारा इसके लिए खरीद का जो काम दिया गया था वह इसी विभाग को दिया गया था, जिसका ज्वाइंट डायरेक्टर वेद प्रकाश पकड़ा गया है। अनुमान लगाया जा रहा है कि यह पैसा सीसीटीवी खरीद में घोटाले के तौर पर लिया गया है । फिलहाल हर पहलू की जांच की जा रही है और रिश्वत का मामला होने के कारण भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की टीम ने इस पूरे मामले की परतें उतारना शुरू कर दिया है।

अब बात वेद प्रकाश की

वेद प्रकाश 1994 में सरकारी नौकरी में भर्ती हुआ था। 8 साल तक वह प्रोग्रामर रहा और करीब 20 साल से वह स्टोर इंचार्ज के रूप में काम कर रहा है। हर कुछ सालों में प्रमोशन होता चला गया और वह जॉइंट डायरेक्टर बन गया, लेकिन अभी भी स्टोर इंचार्ज के रूप में ही काम कर रहा है।

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