समाजवादी पार्टी ने लोकसभा चुनाव 2024 के चुनावी अभियान का आगाज कर दिया है। सपा मुखिया अखिलेश यादव ने मंगलवार को लोक जागरण रथ यात्रा की शुरुआत की। प्रदेश भर में कार्यकर्ता प्रशिक्षण शिविर चलाए जाएंगे। 

लखनऊ। समाजवादी पार्टी ने लोकसभा चुनाव 2024 के चुनावी अभियान का आगाज कर दिया है। सपा मुखिया अखिलेश यादव ने मंगलवार को यूपी के लखीमपुर खीरी से लोक जागरण यात्रा की शुरुआत की। उसके पहले खीरी में कार्यकर्ता प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया था। यह यात्रा लखीमुपर से धौरहरा तक जाएगी।

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लोक जागरण रथयात्रा में अखिलेश यादव ने कही ये बात

लोक जागरण रथयात्रा के दौरान अखिलेश यादव ने कहा कि सपा की कोशिश होगी कि पूरे प्रदेश में प्रशिक्षण शिविर चलाए जाएं। समाज के सामने जो चुनौतिया हैं, उन्हें पार्टी कार्यकर्ता जनता तक पहुंचाएं। कांशीराम जी ने जो फौज तैयार की थी, सपा उन्हें साथ लेगी और बहुजन समाज को भी बड़ी संख्या में सपा से जोड़ने का काम करेगी। माताएं, बहन, नौजवान, पुरुष सबको इस यात्रा से जोड़ा जाएगा।

सभी जिलों व लोकसभा क्षेत्रो में कार्यकर्ता प्रशिक्षण शिविर

दरअसल, सपा की सभी जिलों व लोकसभा क्षेत्रों में ​प्रशिक्षण प्रशिक्षण शिविर चलाने की तैयारी है। आने वाले चुनाव में भाजपा को जवाब देने की तैयारी में जुटी सपा ने लखीमपुर खीरी जिले से इसकी शुरुआत की है। अपनी दो दिवसीय यात्रा पर लखीमपुर खीरी पहुंचे सपा मुखिया अखिलेश यादव ने ऐलान किया था कि सपा के प्रशिक्षण शिविर चलते रहेंगे। शिविर में नेता और कार्यकर्ता मिलकर जनता के मुद्दे पर चर्चा करेंगे और गांव गांव तक उन मुद्दों को पहुंचाने की योजना है।

शिवपाल सिंह यादव ने कार्यकर्ता शिविर को किया संबोधित

प्रशिक्षण शिविर के पहले दिन पार्टी महासचिव शिवपाल सिंह यादव और प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल ने कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। शिविर के दूसरे दिन सपा मुखिया अखिलेश यादव के संबोधन के बाद लोक जागरण यात्रा शुरु हुई। लखीमपुर खीरी की दो दिवसीय यात्रा में अखिलेश यादव नेताओं और पार्टी के पदाधिकारियों से उनके घर जाकर मिले।

लोक जागरण यात्रा कर इन मुद्दो को उठाने की तैयारी

दरअसल, लोक जागरण यात्रा के जरिए सपा सामाजिक न्याय और जातीय जनगणना की मांग को प्रमुखता से उठाने की तैयारी में है। पार्टी के अंदरखाने में भी अतिपिछड़ों व दलितों की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। सेक्टर से लेकर बूथ तक टीम बनाने के निर्देश दिए गए हैं। जानकारों का कहना है कि अखिलेश चाहते हैं कि जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं की ठोस उपस्थिति दिखे। आने वाले चुनावों में उसका असर दिखाई देगा।