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सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की टेलिकॉम कंपनियों की याचिका, 23 जनवरी तक जमा करना बकाया

उच्चतम न्यायालय ने दूरसंचार कंपनियों को 1.47 लाख करोड़ रूपए के वैधानिक बकायों की रकम 23 जनवरी तक जमा करने के अपने आदेश पर पुनर्विचार के लिये दायर याचिकायें बृहस्पतिवार को खारिज कर दीं
 

Supreme Court dismisses petition of telecom companies submission of arrears by 23 January kpm
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New Delhi, First Published Jan 16, 2020, 9:26 PM IST
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नई दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने दूरसंचार कंपनियों को 1.47 लाख करोड़ रूपए के वैधानिक बकायों की रकम 23 जनवरी तक जमा करने के अपने आदेश पर पुनर्विचार के लिये दायर याचिकायें बृहस्पतिवार को खारिज कर दीं। 

शीर्ष अदालत ने 24 अक्टूबर, 2019 को अपनी व्यवस्था में कहा था कि वैधानिक बकाये की गणना के लिए दूरसंचार कंपनियों के समायोजित सकल राजस्व में उनके दूरसंचार सेवाओं से इतर राजस्व को शामिल किया जाना कायदे कानून के अनुसार ही है।

याचिकाओं को किया खारिज 

न्यायमूर्ति अरूण मिश्रा, न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर और न्यायमूर्ति एम आर शाह की पीठ ने संचार कंपनियों की पुनर्विचार याचिकाओं पर चैंबर में विचार किया और उसे अपने फैसले पर पुनर्विचार करने का कोई आधार नजर नहीं आया। पीठ ने इस पर इन याचिकाओं को खारिज कर दिया।

संचार कंपनियों ने अपनी पुनर्विचार याचिकाओं पर न्यायालय में सुनवाई का अनुरोध किया था लेकिन शीर्ष अदालत ने ऐसी याचिकाओं पर चैंबर में ही विचार करने की परंपरा पर कायम रहने का निर्णय किया। शीर्ष अदालत ने पिछले साल 24 अक्टूबर को दूरसंचार विभाग द्वारा समायोजित सकल राजस्व को परिभाषित करने का फार्मूला बरकरार रखते हुये संचार सेवा प्रदाताओं दकी आपत्तियों को 'थोथा' करार दिया था।

निर्देशों पर पुनर्विचार का अनुरोध

भारती एयरटेल ने अपनी याचिका में एजीआर के संबंध में ब्याज, दंड और दंड पर ब्याज के पहलुओं पर दिये गये निर्देशों पर पुनर्विचार का अनुरोध किया था।

संचार मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने पिछले साल नवंबर मे संसद को बताया था कि भारती एयरटेल, वोडाफोन आइडिया और दूसरी संचार कंपनियों पर वैधानिक राशि के रूप में 1.47 लाख करोड़ रूपए बकाया है।

(यह खबर समाचार एजेंसी भाषा की है, एशियानेट हिंदी टीम ने सिर्फ हेडलाइन में बदलाव किया है।)

 

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