अरबपति अमेरिकी कारोबारी एलोन मस्क की कंपनी न्यूरालिंक ने इंसान के दिमाग में चिप लगाया है। इसकी मदद से इंसान बिना हाथ का इस्तेमाल किए कंप्यूटर ऑपरेट कर पाएगा। 

वाशिंगटन। अरबपति अमेरिकी कारोबारी एलोन मस्क (Elon Musk) की कंपनी न्यूरालिंक (Neuralink) ने पहली बार इंसान के दिमाग में चिप लगाने में कामयाबी पाई है। मस्क ने इसकी जानकारी सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दी। उन्होंने कहा कि चिप ठीक से काम कर रहा है। जिस इंसान के ब्रेन में चिप लगाया गया है वह ठीक हो रहा है।

Add Asianetnews Hindi as a Preferred SourcegooglePreferred

Scroll to load tweet…

मस्क ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि प्रारंभिक नतीजे में न्यूरॉन स्पाइक दिखे हैं। बता दें कि न्यूरॉन्स की एक्टिविटी को स्पाइक के रूप में देखा जाता है। न्यूरॉन्स दिमाग की कोशिकाएं हैं। ये दिमाग और पूरे शरीर में इलेक्ट्रिकल और केमिकल सिग्नल्स भेजते हैं जिससे दिमाग और शरीर काम करता है।

सितंबर 2023 में FDA से मिली थी मंजूरी

अमेरिका के FDA (Food and Drug Administration) ने पिछले साल सितंबर में न्यूरालिंक को इंसान के दिमाग में चिप लगाने की मंजूरी दी थी। न्यूरालिंक ने कहा कि उसे पक्षाघात के रोगियों के ब्रेन में चिप लगाने की मंजूरी मिली है।

क्या काम करेगा ब्रेन में लगा चिप?

न्यूरालिंक ने पहले कहा था कि अध्ययन में मस्तिष्क के एक क्षेत्र में ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस (बीसीआई) इम्प्लांट को सर्जरी द्वारा लगाने के लिए रोबोट का इस्तेमाल किया गया। चिप ब्रेन के ऐसे हिस्से में लगाया गया है जो शरीर के मूवमेंट को कंट्रोल करता है। चीप लगाने का शुरुआती लक्ष्य लोगों को कंप्यूटर कर्सर या कीबोर्ड कंट्रोल करने में सक्षम बनाना है। दिमाग में चिप लगने के बाद इंसान अपने मन में विचार करेगा और वह शब्द कंप्यूटर पर लिख जाएगा। इसी तरह इंसान के विचार के अनुसार कर्सर घूमेगा। इससे इंसान बिना हाथ का इस्तेमाल किए कंप्यूटर ऑपरेट कर पाएगा।

Scroll to load tweet…

यह भी पढ़ें- टेक सेक्टर में नहीं थम रही छंटनी, अब इस कंपनी में चलेगी नौकरियों पर कैंची

न्यूरालिंक ने कहा है कि चिप के "अल्ट्रा-फाइन" धागे मरीज के ब्रेन में सिग्नल ट्रांसमिट करने में मदद करते हैं। मस्क ने एक्स पर एक अलग पोस्ट में कहा कि न्यूरालिंक के पहले प्रोडक्ट को टेलीपैथी कहा जाएगा।

यह भी पढ़ें- Youtube ने आखिर क्यों डिलीट किए एक हजार से ज्यादा Videos, जानें कारण