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US ने 7350 मील दूर बैठ काबुल ब्लास्ट प्लानर को किया टारगेट, जानें ड्रोन कैसे ला सकता है युद्ध में क्रांति

अमेरिका ने  MQ-9 रीपर ड्रोन से काबुल एयरपोर्ट ब्लास्ट के प्लानर पर हमला किया। इस ड्रोन के खासियत है कि ये अपने साथ 8 हेलफायर मिसाइलों को ले जा सकता है। 

America revolutionize war by killing Kabul blast planner from drone push of a button 7350 miles away
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Kabul, First Published Aug 29, 2021, 10:01 AM IST

काबुल. अमेरिका और ब्रिटेन ने अफगानिस्तान से अपनी सेना बुलाने का फैसला किया है। ब्रिटेन ने शनिवार को अपने सभी सैनिकों को वापस बुला लिया। अमेरिका का रेस्क्यू ऑपरेशन अभी जारी है। अफगानिस्तान से सेनाओं के लौटने के बाद क्या तालिबान के साथ उनका युद्ध खत्म हो जाएगा? क्या दुनिया अफगानिस्तान को उसके हाल पर छोड़ देगी? इसका जवाब इतना आसान नहीं है, लेकिन जिस तरह से अमेरिका ने 48 घंटे के अंदर काबुल एयरपोर्ट ब्लास्ट के प्लानर और IS के मेंबर को बड़ी सफाई से मौत के घात उतार दिया। उससे ये संकेत मिलते हैं शायद युद्ध के नए तरीकों के साथ तालिबान के खिलाफ ऑपरेशन जारी रह सकता है।

युद्ध में ड्रोन के जरिए नई क्रांति आ सकती है
ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि काबुल प्लास्ट के प्लानर को इतनी सफाई से मारा गया कि दुनिया हैरान रह गई। 48 घंटों के अंदर टारगेट पर निशाना साधना और किसी भी नागरिक को कोई नुकसान पहुंचाए मिशन को अंजाम दिया गया। युद्ध के इस तरीके को एक क्रांति क्यों कहा जा रहा है?

1- अमेरिका ने  MQ-9 रीपर ड्रोन से काबुल एयरपोर्ट ब्लास्ट के प्लानर पर हमला किया। इस ड्रोन के खासियत है कि ये अपने साथ 8 हेलफायर मिसाइलों को ले जा सकता है। 
2- ड्रोन के जरिए बड़ी ही आसानी से टारगेट पर निशाना साधा गया। ISIS के मेंबर को भनक लगे बिना ही ड्रोन ने उसपर अटैक कर दिया। हमले में ब्लास्ट के प्लानर सहित उसके एक साथी को मार गिराया गया। 
3- ऑपरेशन को टारगेट से 7350 मील बैठकर ऑपरेट किया गया। जलालाबाद में ड्रोन उड़ रहा था और 7350 मील दूर बैठ व्यक्ति ने एक बटन दबाकर टारगेट को नेस्तानाबूत कर दिया।  
4- अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि हमले में कोई नागरिक हताहत नहीं हुआ। ये इसलिए भी बड़ी बात है क्योंकि अक्सर देखा गया है कि बड़े ऑपरेशन में नागरिक भी प्रभावित होते हैं। 

ब्लास्ट पर स्थानीय लोगों ने क्या कहा?
अमेरिका की ड्रोन स्ट्राइक को लेकर जलालाबाद के कुछ लोगों ने कहा कि विस्फोट में कुछ निर्दोष नागरिक भी मारे गए हैं। एक स्थानीय निवासी मलिक अदीब ने कहा, पीड़ितों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं।

एक अन्य निवासी ने कहा कि आधी रात को तेज का विस्फोट हुआ। उन्हें लगा कि किसी ने हमारे घर पर रॉकेट दागा है। फिर देखा कि एक ड्रोन आसमान में मंडरा रहा है। 

पहली बार 2000 के सितंबर में हुआ था इस्तेमाल
अफगानिस्तान पर कब्जे में युद्ध के दौरान ड्रोन के इस्तेमाल में भारी वृद्धि हुई। प्रीडेटर ड्रोन पहले अफगानिस्तान में मिलिट्री कैम्प में पहुंचा। इसके बाद इसने युद्ध में एक नई क्रांति ला दी।  

ड्रोन के जरिए ही लादेन का पता लगाया गया था
टॉरगेट का पता लगाने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल अफगानिस्तान में पहली बार 2000 के सितंबर में किया गया था। करीब 10 सफल उड़ानों के बाद एक ड्रोन ने 25 सितंबर को ओसामा बिन लादेन को देखा। लेकिन 7 जून 2001 को पहली स्ट्राइक में तालिबान के सुप्रीम कमांडर मुल्ला उमर को टारगेट किया गया, लेकिन निशाना चूक गया। मुल्ला उमर को भागने का मौका मिल गया। 

सीआईए के एक्स ऑफिसर गैरी श्रोएन के मुताबिक, ठीक 5 दिन बाद ड्रोन के जरिए भारी गलती हुई। अल-कायदा मेंबर समझ जमीन पर मौजूद सीआईए एजेंटों पर बमबारी कर दी गई। हालांकि वे बच गए। फिर कई हफ्तों के बाद एक सफर एयर स्ट्राइक में अल कायदा चीफ मोहम्मद अतेफ को मार दिया गया। लेकिन इसके बाद US आर्म्ड ड्रोन प्रोग्राम को बंद करने पर सोचा जाने लगा। हालांकि ड्रोन प्रोग्राम को बंद नहीं किय गया।

ड्रोन के इस्तेमाल को बढ़ा दिया गया है। साल 2018 तक प्रीडेटर ड्रोन की संख्या 16 थी, जो बढ़कर 360 हो गई। अब ड्रोन को नए और बेहतर प्रीडेटर 2 या MQ-9 रीपर में बदल दिया गया है। ड्रोन के जरिए अफगानिस्तान में सबसे ज्यादा बम गिराए गए। 2019 में  कुल 7423 बम गिराए गए। यानी एक दिन में करीब 20 बम गिराए गए। 

उसी साल यानी 2019 में नवंबर में पख्तिया के पहाड़ी क्षेत्र के एक गांव में एक रीपर ड्रोन ने स्थानीय लोगों को भारी नुकसान पहुंचाया। 3 बच्चों सहित 7 निर्दोष लोगों की जान चली गई। ऐसे में ड्रोन से युद्ध में एक क्रांति आ सकती है। एक बदलाव आ सकता है, लेकिन इसके इस्तेमाल में बहुत ज्यादा सावधानी की गुंजाइश है।

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