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अयोध्या में राममंदिर बनने के बाद भी नहीं बदलेगी कोई पहचान, महासचिव चंपत राय ने निर्माण को लेकर बताई बड़ी बात

यूपी की रामनगरी में राममंदिर निर्माण के साथ-साथ दिसंबर से परकोटे का भी निर्माण शुरू होगा। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट पौराणिक मंदिरों को अधिग्रहीत कर उन्हें तोड़ने की योजना बना रहा है। इसको लेकर चंपत राय ने स्थिति साफ कर दी और कहा कि किसी भी मंदिर को नहीं तोड़ा जाएगा।

Ayodhya construction Ram temple no identity will change General Secretary Champat Rai told big thing about construction
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First Published Nov 24, 2022, 12:52 PM IST

अयोध्या: उत्तर प्रदेश की रामनगरी अयोध्या में राममंदिर निर्माण के साथ-साथ दिसबंर के महीने से परकोट का भी निर्माण शुरू हो जाएगा। इसके अंदर रामजन्मभूमि पथ के निर्माण के बीच कई प्राचीन व पौराणिक मंदिर आ रहे हैं। इस वजह से अटकलें तेज रहीं कि श्रीराम मंदिर जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट पौराणिक मंदिरों को अधिग्रहीत कर उन्हें तोड़ने की योजना बना रहा है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने स्पष्ट किया है कि पौराणिक मंदिरों की सुरक्षा से ही रामकोट व राममंदिर की पहचान है इसलिए कोई भी पौराणिक मंदिर में नहीं तोड़ा जाएगा और इसकी कोई जरूरत भी नहीं है। 

साजिश के तहत उड़ रही है इस तरह की अफवाह
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने कहा है कि साजिश के तहत इस तरह की अफवाह फैलाई जा रही है। इसमें किसी भी प्रकार की कोई सच्चाई नहीं है। सुग्रीव किला से राम जन्मभूमि तक 800 मीटर लंबा राम जन्मभूमि पथ का निर्माण कार्य चल रहा है। इस निर्माण की जद में अमावां राममंदिर व रंगमहल के पीछे का कुछ हिस्सा भी आ रहा था। अमावां राममंदिर के प्रबंधक पूर्व आईपीएस किशोर कुणाल ने ट्रस्ट को तीन सुझाव दिए थे। उसमें से एक सुझाव यह भी था कि मंदिर का प्रवेश मार्ग दक्षिण की ओर होना वास्तु शास्त्र के हिसाब से अनुचित है। इस वजह से उत्तर-दक्षिण दोनों तरफ रास्ते को बढ़ाकर मध्य से सीता रास्ता बनाया जाए, जो रामगुलेला चौराहा तक होना चाहिए। इसके अलावा इसी मार्ग पर राममंदिर का सिंहद्वार भी बनेगा।

अफवाह फैलने के बाद मंदिर के महंतों ने की बैठक
दूसरी ओर इस रास्ते में पौराणिक रंगमहल, रामकचेहरी, जगन्नाथ मंदिर व लवकुश मंदिर आ रहे थे। इस बीच इन मंदिरों को अधिग्रहीत करने व तोड़े जाने की अफवाह भी तेजी से फैल गई। जिसके चलते मंदिर के पीठाधिपतियों की चिंता भी बढ़ गई। चंपत राय ने आगे बताया कि 18 व 19 नवंबर को हुई बैठक में मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र की मौजूदगी में मंदिर के महंतों के साथ बैठक भी की थी। इस दौरान किशोर कुणाल भी मौजूद रहे। उसके बाद पौराणिक मंदिरों के अधिग्रहण की चर्चाएं और भी तेज हो गई थी। इस वजह से चंपत राय ने बुधवार को साफ कह दिया है कि जन्मभूमि पथ के निर्माण का गतिरोध दूर हो गया है। किसी भी पौराणिक मंदिर को नहीं तोड़ा जाएगा और न ही इसकी जरूरत है।

परकोटे की दीवारों पर उकेरे जाएंगे देवी-देवता
चंपत राय ने साफ कह दिया है कि परकोटा निर्माण में भी कोई बदलाव नहीं किया गया है। उन्होंने आगे कहा कि पहले दिन वास्तुकार आशीष सोमपुरा द्वारा बनाई गई डिजाइन पर आज भी काम को रहा है। साथ ही मंदिर के चारों दिशाओं में 800 मीटर परकोटा आयताकार बनाया जाएगा और उसमें छह मंदिर बनाए जाएंगे। इसके अलावा चारों दिशाओं में एक-एक मंदिर होगा। आगे कहते है कि उत्तर व दक्षिण दिशा के बीच में भी एक-एक मंदिर बनेगा। इन सबके अलावा परकोटे की दीवारों पर देवी-देवताओं सहित रामकथा से संबंधित 150 चित्र उकेरे जाएंगे और इसको बनाए जाने के लिए किसी मंदिर को तोड़े जाने की जरूरत नहीं है।

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