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हिंदूवादी नेता हत्याकांड में बड़ा खुलासा, पति की हत्या होने के बाद दूसरी पत्नी ने फेसबुक पर किया था पोस्ट, लिखी थी ये बातें

कालिंदी ने पोस्ट के नीचे ओसीआर बिल्डिंग का पता भी लिखा था। पूछने पर कालिंदी ने बताया कि अस्पताल में पहुंचने पर उन्हें पता चला कि रणजीत की मौत हो गई है। वह अकेली थीं। उन्होंने लोगों से मदद के लिए यह पोस्ट डाला था।

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Lucknow, First Published Feb 4, 2020, 12:20 PM IST
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लखनऊ (Uttar Pradesh) । राजधानी लखनऊ के हजरतगंज इलाके में 2 फरवरी को हुई अंतरराष्ट्रीय हिंदू महासभा के अध्यक्ष रंजीत (रणजीत) बच्चन की हत्या के मामले में एक और खुलासा हुआ है। इस हिंदूवादी नेता की दूसरी पत्नी कालिंदी ने वारदात के बाद रविवार की सुबह ही सोशल मीडिया पर पोस्ट डाला था। जिसमें लिखा था कि आज सुबह मेरे पति रणजीत बच्चन (विश्व हिंदू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष) को समुदाय विशेष के लोगों ने गोली मार कर हत्या कर दी। बता दें कि इस मामले की जांच के लिए आठ टीमें लगाई गई हैं, लेकिन अभी पुलिस को सफलता नहीं मिली है।

पुलिस को बताई इसलिए डाली थी पोस्ट
कालिंदी ने पोस्ट के नीचे ओसीआर बिल्डिंग का पता भी लिखा था। पूछने पर कालिंदी ने बताया कि अस्पताल में पहुंचने पर उन्हें पता चला कि रणजीत की मौत हो गई है। वह अकेली थीं। उन्होंने लोगों से मदद के लिए यह पोस्ट डाला था।

बिल्डिंग से परिवर्तन चौराहे तक की खंगाली गई फुटेज
रणजीत के परिवारजन, आदित्य, कालिंदी और अन्य लोगों के बयान के आधार पर पुलिस ने सोमवार को दोबारा ओसीआर बिल्डिंग से लेकर परिवर्तन चौक तक लगे सारे कैमरे खंगाले। यही नहीं उन स्थानों की फुटेज भी निकलवाई जा रही है, जहां शनिवार से पहले रणजीत मार्निंग वॉक पर गए थे। सूत्रों के मुताबिक जिस स्थान पर संदिग्धों की साफ तस्वीर कैमरे में कैद हुई है वहीं पर किसी ने हत्यारों को रणजीत की मुखबिरी की थी। पुलिस ने संदेह के आधार पर कुछ करीबियों से पूछताछ की है, जिनमें महिलाएं भी शामिल हैं।

कौन थे रंजीत बच्चन

अंतरराष्‍ट्रीय हिंदू महासभा के अध्यक्ष रंजीत बच्चन भारतेंदु नाट्य एकेडमी से साल 2010 में ग्रेडेड आर्टिस्ट थे। वर्तमान में गुलरहिया के टोला पतरका में निवास करते थे। करीब 18 वर्ष सामाजिक एवं राजनीतिक क्षेत्र में सक्रिय रहे।भारत और भूटान साइकिल यात्रा में दल नायक रहे। उनका नाम लिम्का बुक आफ रिकार्ड में दर्ज हुआ था। उन्होंने भारतीय सोशल वेलफेयर फाउंडेशन गोरखपुर की स्थापना की थी।

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