Asianet News HindiAsianet News Hindi

प्रोफेसर के इस्तीफा देने के बाद केंद्रीय मंत्री का बड़ा बयान, फिरोज खान ही BHU में संस्कृत पढ़ाएंगे

काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में प्रोफेसर फिरोज खान के संस्कृत पढ़ाने के विरोध का मुद्दा लोकसभा तक पहुंच गया है। सदन में विपक्षी पार्टियों द्वारा मामला उठाए जाने पर केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा, फिरोज खान बीएचयू के संस्कृत विभाग में प्रोफेसर हैं और वो संस्कृत ही पढ़ाएंगे।

hrd minister pokhriyal said firoz khan will continue to teach sanskrit in bhu KPU
Author
Varanasi, First Published Dec 13, 2019, 12:39 PM IST
  • Facebook
  • Twitter
  • Whatsapp

वाराणसी (Uttar Pradesh). काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में प्रोफेसर फिरोज खान के संस्कृत पढ़ाने के विरोध का मुद्दा लोकसभा तक पहुंच गया है। सदन में विपक्षी पार्टियों द्वारा मामला उठाए जाने पर केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा, फिरोज खान बीएचयू के संस्कृत विभाग में प्रोफेसर हैं और वो संस्कृत ही पढ़ाएंगे। बता दें, हाल ही में विरोध के चलते प्रोफेसर ने संस्कृत संकाय से इस्तीफा दे कला संकाय के आयुर्वेद विभाग में ज्वाइन कर लिया है।

आयुर्वेद विभााग के इंटरव्यू में पहले स्थान पर आए फिरोज खान
बता दें, फिरोज खान ने बीएचयू के दो विभागों में असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर आवेदन किया था। पहला संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय और दूसरा आयुर्वेद विभाग। जिसके बाद उन्हें संस्कृत संकाय में नियुक्ति मिली थी। लेकिन छात्रों के विरोध के बाद उन्होंने आयुर्वेद विभाग में इंटरव्यू दिया, जिसमें वे पहले स्थान पर रहे। बताया जा रहा है कि आयुर्वेद विभाग की तरफ से उन्हें नियुक्ति पत्र जारी किया जा चुका है। एक महीने के अंदर उन्हें ज्वाइनिंग करनी है। 

बीएचयू में प्रोफेसर की नियुक्ति का विवाद
बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (बीएचयू) में फिरोज खान को संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय के साहित्य विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर नियुक्त करने को लेकर विवाद चल रहा है। फिरोज खान की नियुक्ति को लेकर छात्र लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। जबकि, यूनिवर्सिटी साफ कर चुका है कि खान की नियुक्ति बीएचयू एक्ट, केंद्र सरकार और यूजीसी की गाइडलाइंस के तहत ही हुई है। 

प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना था, संस्कृत कोई पढ़ और पढ़ा सकता है, इस पर हमारा ऐतराज नहीं। हमारा ऐतराज यह है कि सनातन धर्म की बारीकियां, महत्व और आचरण का कोई गैर सनातनी (जो दूसरे धर्म का है) कैसे पढ़ा सकता है? शिक्षण के दौरान साल में जब पर्व आते हैं तो हम गौमूत्र का भी सेवन करते हैं तो क्या नियुक्त हुए गैर सनातनी शिक्षक उसका पालन करेंगे। बता दें, बीएचयू में पिछले 4 साल से ऋषि शर्मा छात्रों को उर्दू पढ़ा रहे हैं। 

द्रमुक, कांग्रेस और बसपा ने लगाया आरोप
बता दें, लोकसभा में केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय विधेयक पर चर्चा के दौरान द्रमुक सांसद ए राजा, कांग्रेस सांसद बेनी बहनान और बसपा के कुंवर दानिश अली ने प्रोफेसर फिरोज खान के मुद्दे को उठाया। द्रमुक के ए राजा ने कहा, भाजपा के सदस्य संस्कृत को देवभाषा होने की बात करते हैं। लेकिन क्या यह केवल हिंदुओं की भाषा है? ऐसा है तो हम इस बात को स्वीकार नहीं करते। 

- कांग्रेस के बेनी बहनान ने कहा, हमें धर्म और भाषा को नहीं मिलाना चाहिए। प्रोफेसर को मजबूरन इस्तीफा देना पड़ा। 

- बसपा के दानिश अली ने कहा, हमारे देश में मिलीजुली संस्कृति है लेकिन राजनीति के कारण इसे खत्म किया जा रहा है। इसी के तहत फिरोज को संस्कृत नहीं पढ़ाने दी जा रही।

Follow Us:
Download App:
  • android
  • ios