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गुनहगार को फांसी देने के बाद कैसा महसूस करते हैं? जल्लाद पवन के बेटे की जुबानी सुनें अनसुनी कहानी

जल्लाद पवन के बेटे अमन कुमार ने बताया कि उसकी चार पुश्तें फांसी देने का काम करती आ रही हैं,ये हम लोग अपना सौभाग्य समझते हैं कि किसी गुनहगार को सजा देने में हमारी सहभगिता रहती है

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Meerut, First Published Dec 13, 2019, 2:41 PM IST
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मेरठ(Uttar Pradesh ). निर्भया के गुनाहगारों को फांसी देने के लिए मेरठ के पवन जल्लाद को तिहाड़ जेल से पत्र मिल गया है। पवन ने फांसी के लिए अपनी सहमति भी जता दी है। मेरठ जेल प्रशासन ने उसको तिहाड़ का पत्र रिसीव कराते हुए उसकी सहमति पत्र लखनऊ-दिल्ली को भेज दिया है। hindi.asianetnews.com ने जल्लाद पवन के बेटे अमन कुमार से बात की। उसने बताया कि वह भी पिता की विरासत संभालना चाहता है।

दिल्ली में हुए बहुचर्चित रेप और हत्या का मामला निर्भया कांड में चारों गुनहगारों को फांसी की सजा सुनाई गई है। इसके लिए तिहाड़ जले प्रशासन ने यूपी जेल विभाग से दो जल्लाद मांगे थे। यूपी में सिर्फ दो जल्लाद मेरठ का पवन और लखनऊ का इलियास है। लेकिन इलियास की तबियत कुछ दिनों से खराब चल रही है। ऐसे में पवन को भेजा जाना तय माना जा रहा था। इस मामले में तिहाड़ प्रशासन की तरफ से पत्र भी भेजा गया था जिस पर जल्लाद पवन ने अपनी स्वीकृति दे दी है। जल्लाद पवन का बड़ा बेटा अमन कुमार मेरठ के चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी में कांट्रेक्ट बेस पर बतौर क्लर्क काम करता है।

किसी गुनहगार को हमारे हांथों से सजा मिले ये सौभाग्य की बात
जल्लाद पवन के बेटे अमन कुमार ने बताया कि उसकी चार पुश्तें फांसी देने का काम करती आ रही हैं। उसने बताया कि आम तौर पर लोग जल्लाद शब्द गाली की तरह इस्तेमाल करते हैं लेकिन ये हम लोग अपना सौभाग्य समझते हैं कि किसी गुनहगार को सजा देने में हमारी सहभगिता रहती है। जिस गुनहगार को अदालत में जज सजा सुनाते हैं उसे अंजाम तक पहुंचाने में हमारी भूमिका होती है।

खुद संभालना चाहते हैं विरासत 
जल्लाद पवन के बेटे अमन ने बताया कि वह भी पिता की ही तरह जल्लाद बनना चाहता है। उसने बताया कि मेरे परदादा के जमाने से ये प्रथा हमारे परिवार में चल रही है। मेरे पिता जी के बाद उनकी ये विरासत मै खुद संभालना चाहता हूं। अगर पिता जी की ये विरासत मै संभाल पाया तो ये मेरे लिए गर्व की बात होगी। यही नहीं वह पिता से इस काम की बेसिक बातें मौखिक सीख भी रहे हैं।

पैसों का अभाव पैदा करता है मुश्किलें
अमन ने बताया कि इस काम में सबसे बड़ी समस्या पैसों की है। सरकार की तरफ से भी इसके लिए कभी ध्यान नहीं दिया गया। अमन ने बताया कि पूर्व की मायावती व अखिलेश सरकार में व मुख्यमंत्री को पत्र लिख चुका है। लेकिन उसकी बात पर सुनवाई नहीं हुई। उसने बताया कि उसके पिता को सिर्फ 3 हजार रूपए मेरठ जेल से मिलते हैं। इन पैसों से परिवार का भरण-पोषण कर पाना बेहद मुश्किल होता है। इसके लिए पिता को दूसरे कई पार्ट टाइम काम करने पड़ते हैं। उसने कहा कि हमारी सरकार से मांग है कि जल्लाद के लिए कम से कम इतना मानदेय जरूर किया जाना चाहिए ताकि उसका परिवार चल सके।

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