पीएम मोदी से लेकर गृह मंत्री अमित शाह और राजनाथ सिंह जैसे सियासत के मझे हुए खिलाड़ी चुनावी चौसर पर जनाधार बटोरने के लिए गोटियां सेट करने में जुटे हुए हैं। या यूं कहें कि, चुनावी नब्ज टटोलने और सियासी थाह लेने की कोशिश कर रहे हैं।

लखनऊ: दिल्ली की सत्ता का रास्ता यूपी से होकर जाता है ये बात सियासत के हर खिलाड़ी को बाखूबी पता है। ऐसे में यूपी में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव (Up Vidhansabha Chunav 2022)को जीतना इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि उसके बाद 2024 का लोकसभा चुनाव (2024 Loksabha Election) भी दिखाई दे रहा है। देश की सबसे ज्यादा लोकसभा और विधानसभा सीटों वाले सूबे की सत्ता पर जिसने कब्जा कर लिया उसके लिए दिल्ली (Delhi) का रास्ता कहीं न कहीं आसान हो जाता है। इसलिए बीजेपी 2022 विधानसभा चुनाव के लिए पूरी ताकत के साथ जुटी हुई है। 

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बीजेपी की सियासी रणनीति

बीजेपी ने यूपी की चुनावी किलेबंदी कर दिग्गज नेताओं को पहरेदारी के लिए मैदान में उतार दिया है। पीएम मोदी (Prime Minister Narendra Modi)से लेकर गृह मंत्री अमित शाह और राजनाथ सिंह जैसे सियासत के मझे हुए खिलाड़ी चुनावी चौसर पर जनाधार बटोरने के लिए गोटियां सेट करने में जुटे हुए हैं। या यूं कहें कि, चुनावी नब्ज टटोलने और सियासी थाह लेने की कोशिश कर रहे हैं।

जीत का मंत्र देंगे जेपी नड्डा

लखनऊ में 19 नवंबर की रात में पहुंचे पीएम मोदी और अमित शाह डीजीपी कॉन्फ्रेंस में मौजूद हैं। यहां पीएम मोदी रविवार की शाम तक रहेंगे और फिर बांदा पहुंचकर बुंदेलखंड की जनता को करोड़ों की सौगात देंगे। वहीं अगले दिन 22 नवंबर को बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा गोरखपुर में होने वाले बूथ अध्यक्षों के सम्मेलन में शामिल होने के लिए पहुंचेंगे। इस सम्मेलन के जरिए जेपी नड्डा जनता के मन को टटोलने के साथ बूथ अध्यक्षों को जीत का मंत्र देंगे और उसके बाद प्रदेश मुख्यालय पर पदाधिकारियों के साथ बैठक करेंगे।

टटोली जा रही यूपी वालों की नब्ज

जेपी नड्डा 23 नवंबर को कानपुर में होने वाले बूथ अध्यक्षों के सम्मेलन में भी शामिल होंगे। दूसरी तरफ रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह 25 नवंबर को सीतापुर और 27 नवंबर को जौनपुर में बूथ अध्यक्ष सम्मेलन को संबोधित करेंगे। पार्टी के नेताओं का कहना है कि, इन सम्मेलन और दौरे से यूपी की चुनावी नब्ज टटोलने के बाद दिसंबर में आगे की रणनाीति तैयार की जाएगी।