बोर्ड परीक्षा का डर सिर्फ पढ़ाई का नहीं होता, बल्कि अच्छे नंबर, माता-पिता की उम्मीदें और समाज का दबाव मिलकर स्टूडेंट्स को मानसिक तनाव में डाल देते हैं।
कई स्टूडेंट्स को सब आता है, फिर भी एग्जाम हॉल में बैठते ही डर हावी हो जाता है। यह डर आत्मविश्वास कम करता है और दिमाग खाली सा लगने लगता है।
बोर्ड एग्जाम जिंदगी का आखिरी पड़ाव नहीं है। जब आप रिजल्ट की जगह अपनी तैयारी पर ध्यान देते हैं, तो दबाव कम होता है और परफॉर्मेंस बेहतर होती है।
बोर्ड परीक्षा का डर कोई बीमारी नहीं है। सही सोच, समय की प्लानिंग और रोजमर्रा की आदतों में छोटे बदलाव से इस डर को आसानी से हराया जा सकता है।
पूरा सिलेबस एक साथ देखने से डर बढ़ता है। इसे छोटे हिस्सों में बांटकर पढ़ें। हर टॉपिक पूरा करने से आत्मविश्वास बढ़ता है और डर धीरे-धीरे खत्म होता है।
रटकर पढ़ी चीजें तनाव में भूल जाती हैं। अगर आप कॉन्सेप्ट समझ लेते हैं, तो सवाल चाहे जैसे आएं, आप उन्हें अपने शब्दों में लिख पाते हैं।
मॉक टेस्ट एग्जाम के डर को कम करते हैं। घर पर एग्जाम जैसा माहौल बनाकर पेपर हल करने से दिमाग असली परीक्षा के लिए तैयार हो जाता है।
कम नींद और गलत खानपान से याददाश्त कमजोर होती है। 8 घंटे की नींद और हल्का, घर का बना खाना दिमाग को एक्टिव और शांत रखता है।
एग्जाम से पहले खुद से पॉजिटिव बात करें। दूसरों से तुलना करने की बजाय अपनी तैयारी पर भरोसा रखें। आत्मविश्वास ही डर का सबसे बड़ा इलाज है।