ये हैदराबादी शब्द बाहर वालों को क्यों नहीं समझ आते?
Career Feb 01 2026
Author: Akshansh Kulshreshtha Image Credits:Meta AI
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नक्को: सिर्फ ‘नहीं’ नहीं, पूरा मूड है
हैदराबाद में ‘नक्को’ का मतलब सिर्फ मना करना नहीं होता, बल्कि बातचीत का अंदाज़ भी होता है। बाहर वाले इसे रूखा समझ लेते हैं, जबकि यहां यह बिल्कुल नॉर्मल शब्द है।
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हाऊ: सवाल कम, एक्सप्रेशन ज़्यादा
‘हाऊ?’ सुनते ही लोग सोचते हैं ये कैसे बोल रहे हैं। असल में यह हैरानी, शक या मज़ाक—all-in-one एक्सप्रेशन है, जो हैदराबाद में खूब चलता है।
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कैकू बोले तो वजह ही नहीं है
जब कोई बिना कारण कुछ करे या बोले, तो यहां कहा जाता है ‘कैकू?’ बाहर वालों को यह शब्द सबसे ज़्यादा कन्फ्यूज़ करता है, क्योंकि हिंदी में इसका सीधा जवाब नहीं है।
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बैगन की बातें का मतलब समझना जरूरी है
हैदराबाद में ‘बैगन’ सब्ज़ी नहीं, इमोशन है। ‘बैगन की बातें’ मतलब बेकार या फालतू चर्चा—लेकिन बाहर वाले इसे सीरियस ले लेते हैं।
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अरे मियां, इतना भी सीरियस मत लो
‘मियां’ यहां दोस्ती और अपनापन दिखाने का शब्द है। बाहर से आए लोग इसे गलत समझ बैठते हैं, जबकि हैदराबाद में यह रोज़मर्रा की भाषा है।
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हैदराबादी भाषा में उर्दू का देसी तड़का
इस भाषा में उर्दू, हिंदी और लोकल स्टाइल का जबरदस्त मिक्स है। यही वजह है कि यह सुनने में अलग और समझने में थोड़ा टाइम लेती है।
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एक बार समझ गए, फिर प्यार हो जाएगा
शुरुआत में हैदराबादी भाषा अजीब लग सकती है, लेकिन जब इसके शब्द समझ आने लगते हैं, तो यही भाषा सबसे मज़ेदार और दिल से जुड़ी लगती है।