टाइम्स नाऊ को जानकारी देते हुए डॉ. परवंडा कहते हैं कि पेट्रोलियम आधारित यौगिकों से प्राप्त सिंथेटिक रंगों का उपयोग लिपिस्टिक में किया जाता है जो कैंसर पैदा कर सकते हैं।
प्रोपलीन ग्लाइकोल का यूज ब्रेक फ्लूड और एंटीफ्रीज के रूप में किया जाता है। ये त्वचा में जलन और एलर्जी पैदा करते हैं।
पैराबेन्स प्रिजर्वेटिव्स का इस्तेमाल लंबे समय तक लिपिस्टिक को माइक्रोब्स से सुरक्षित रखने के लिए किया जाता है।
लिप बाम का इस्तेमाल करने से इरिटेशन की समस्या हो सकती है। साथ ही इसका इस्तेमाल न करने से लिप सूखने लगते हैं। ऐसा एल्कोहल मिला होने के कारण होता है।
कूल प्रॉपर्टी के कारण लिप बाम में कपूर का इस्तेमाल किया जाता है। इससे होंठों में जलन पैदा होती है और त्वचा का पानी भी सूखने लगता है।
बार बार होंठों में सैलिसिलिक एसिड लगने से इरिटेशन हो सकता है। सैलिसिलिक एसिड होंठों से डेड स्किन निकालने में जरूर मदद करता है।