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Walking vs Yoga? 40+ की उम्र में क्या बेहतर, जरा संभलकर चुनें

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40+ एज ग्रुप के लिए क्या बेस्ट?

40 की उम्र पार करते ही शरीर के सिग्नल बदलने लगते हैं। अब थकान, घुटनों का दर्द या बैक स्ट्रेन देने लगती है। ऐसे में Walking करें या Yoga? 40+ एज ग्रुप के लिए क्या बेस्ट?

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शरीर पर असर और जॉइंट सेफ्टी

Walking एक नेचुरल मूवमेंट है, लेकिन 40+ उम्र में तेज या लंबी वॉक घुटनों, एंकल और लोअर बैक पर इम्पैक्ट करती है। कार्टिलेज पहले से पतली हो या वजन ज्यादा हो, तो दर्द बढ़ा सकता है। 

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Yoga लो-इम्पैक्ट एक्टिविटी

Yoga लो-इम्पैक्ट एक्टिविटी है, जिसमें शरीर का वजन संतुलित तरीके से सभी मसल्स में बंटता है। इससे जोड़ों पर अनावश्यक दबाव नहीं पड़ता और जॉइंट्स की मूवमेंट सुरक्षित रहती है।

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वजन घटाने पर असर

Walking से कैलोरी बर्न होती है, लेकिन 40+ उम्र में वजन बढ़ने की वजह सिर्फ फैट नहीं, बल्कि स्लो मेटाबॉलिज्म और हार्मोनल बदलाव भी होते हैं। इसलिए वॉक के बाद भी वजन नहीं घटता। 

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योगा के डाइजेशन और हार्मोन पर असर

Yoga वजन घटाने की बजाय पहले शरीर के अंदरूनी सिस्टम—डाइजेशन, हार्मोन और इंसुलिन रिस्पॉन्स को सुधारता है। जब सिस्टम ठीक होता है, तब वजन अपने आप कंट्रोल में आने लगता है।

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हार्मोन और मेटाबॉलिज्म पर प्रभाव

Walking दिल और फेफड़ों के लिए अच्छी है, लेकिन यह हार्मोनल बैलेंस पर सीमित असर डालती है। Yoga में आसन और प्राणायाम थायरॉइड, एड्रिनल और सेक्स हार्मोन को बैलेंस करने में मदद मिलेगी। 

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लॉन्ग-टर्म एक्टिव

40+ उम्र में जहां मेटाबॉलिज्म स्लो हो जाता है, वहां Yoga शरीर को लॉन्ग-टर्म एक्टिव बनाए रखने में ज्यादा असरदार साबित होता है।

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जॉइंट पेन और बैक पेन में राहत

पहले से घुटनों, कमर या सर्वाइकल में दर्द है, तो तेज वॉक कई बार समस्या को बढ़ाती है। Yoga में स्ट्रेचिंग, स्ट्रेंथ और रिलैक्सेशन तीनों होते हैं, जिससे जॉइंट्स की लचीलापन बढ़ता है।

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मानसिक स्वास्थ्य और स्ट्रेस कंट्रोल

Walking मूड को बेहतर बनाती है और स्ट्रेस कम करती है, लेकिन यह नर्वस सिस्टम पर गहराई से काम नहीं करती। Yoga में सांसों की गति और माइंडफुल मूवमेंट से स्ट्रेस हार्मोन कम होता है। 

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चिड़चिड़ापन और एंग्जायटी का इलाज

40+ उम्र में जहां नींद की परेशानी, चिड़चिड़ापन और एंग्जायटी आम होती है, वहां Yoga मानसिक संतुलन बनाए रखने में ज्यादा मदद करता है।

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