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कौन हैं मुफ्ती नूर अहमद नूर, जिन पर तालिबान ने जताया भरोसा?

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क्या यह भारत-तालिबान रिश्तों में सॉफ्ट डिप्लोमेसी का संकेत है?

दिल्ली में तालिबान अधिकारी मुफ्ती नूर अहमद नूर ने अफगान दूतावास की कमान संभाल ली है। क्या यह सिर्फ़ प्रशासनिक बदलाव है या भारत-तालिबान रिश्तों में धीरे-धीरे पिघलती बर्फ़ का संकेत?

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दिल्ली में तालिबान की नई एंट्री?

तालिबान के वरिष्ठ अधिकारी मुफ्ती नूर अहमद नूर ने दिल्ली स्थित अफगान दूतावास में चार्ज डी’अफेयर्स का कार्यभार संभाला। भारत ने अभी तालिबान को मान्यता नहीं दी है।

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कौन हैं मुफ्ती नूर अहमद नूर?

मुफ्ती नूर अहमद तालिबान सरकार में भरोसेमंद चेहरा माने जाते हैं। वे पहले अफगानिस्तान के विदेश मंत्रालय में राजनीतिक मामलों के DG रह चुके हैं। उन्हें नीति व कूटनीति की गहरी समझ है।

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मुत्ताकी दौरे से मजबूत हुआ तालिबान कंट्रोल

अक्टूबर में विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी की दिल्ली यात्रा के दौरान दूतावास में इस्लामिक अमीरात का झंडा दिखा। मुत्ताकी ने साफ कहा था-दूतावास पूरी तरह तालिबान के नियंत्रण में है।

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मान्यता नहीं, लेकिन बातचीत जारी क्यों?

भारत ने तालिबान सरकार को औपचारिक मान्यता नहीं दी है, फिर भी अफगानिस्तान को मानवीय सहायता, दवाइयाँ और राहत सामग्री भेजी जा रही है। यह संकेत देता है कि रिश्ते पूरी तरह टूटे नहीं हैं।

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दिल्ली ही नहीं, मुंबई-हैदराबाद भी संकेत दे रहे हैं?

मुंबई और हैदराबाद के अफगान वाणिज्य दूतावास पहले से तालिबान द्वारा नियुक्त राजनयिक चला रहे हैं। इससे साफ है कि ज़मीन पर तालिबान की कूटनीतिक पकड़ धीरे-धीरे मजबूत हो रही है।

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चाबहार पोर्ट और-असली वजह?

भारत-अफगान बातचीत के पीछे व्यापार, ऊर्जा सहयोग और ईरान के चाबहार पोर्ट की रणनीति अहम मानी जा रही है। क्या मुफ्ती नूर अहमद की नियुक्ति आने वाले बड़े बदलाव का संकेत है?

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