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क्या हैं अविमुक्तेश्वरानंद का असली नाम, नेता से कैसे बने शंकराचार्य?

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प्रयागराज प्रशासन ने दिया नोटिस

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का विवाद बढ़ता जा रहा है। मौनी अमावस्या पर माघ मेला में पालकी से स्नान को लेकर प्रयागराज प्रशासन ने नोटिस दिया है। मेले में बैन की मांग भी उठी है।

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खुद को घोषित किया शंकराचार्य

11 सिंतबर 2022 को स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती का निधन हो गया था। इसके अगले दिन ही स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद खुद को ज्योतिर्मठ (जोशीमठ) का शंकराचार्य घोषित कर लिया।

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उमाशंकर उपाध्याय घर का नाम

अविमुक्तेश्वरानंद का जन्म 5 अगस्त, 1969 को उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के पट्टी तहसील के ब्राह्मणपुर गांव में हुआ है। उनका मूल नाम उमाशंकर उपाध्याय है। 

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छात्र राजनीति में भी रह चुके हैं स्वामी

अविमुक्तेश्वरानंद ने वाराणसी के संस्कृत विश्वविद्यालय से शास्त्री और आचार्य की शिक्षा ग्रहण की है। वह छात्र राजनीति में भी रहे हैं। 1994 में छात्रसंघ का चुनाव जीत चुके हैं

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कैसे मिला अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती नाम

संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से आचार्य की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्हें 15 अप्रैल 2003 को दंड सन्यास की दीक्षा दी गई। तबी उन्हें स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती नाम मिला।

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स्वामी गुजरात जाने के बाद बने संत

बताया जाता है स्वामी पढ़ाई के बाद में वे गुजरात चले गए, जहां वह स्वामी करपात्री जी संपर्क में आए और आखिरी समय तक उनके साथ रहे। तभी वह स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के संपर्क में आए।

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चारों वेद की ली शिक्षा

अविमुक्तेश्वरानंद ने संस्कृत व्याकरण, वेद, पुराण, उपनिषद, वेदांत, आयुर्वेद और शास्त्रों की गहन शिक्षा के बाद 1990 के दशक में संन्यास लिया। 2022 में वो  ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य

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