वृंदावन वाले प्रेमानंद महाराज पाश्चात्य संस्कृति के खिलाफ खुलकर बोलते हैं। उन्होंने बताया कि यदि सही उम्र में लड़का-लड़की का विवाह कर दिया जाए तो एक बड़ी समस्या से बचा जा सकता है।
प्रेमानंद महाराज के अनुसार, ‘18-20 वर्ष के बाद यौवन का भारी प्रकोप होता है। इसलिए इस उम्र तक लड़का-लड़की का विवाह कर लेना चाहिए। इसके बाद आप पढ़ाई-लिखाई भी कर सकते हो।’
प्रेमानंद महाराज ने कहा ’18-20 वर्ष की उम्र तक यदि लड़का-लड़की का विवाह कर दिया जाए तो उनका मन इधर-उधर नहीं भटकेगा और वे अपने जीवनसाथी के प्रति ईमानदार बने रहेंगे।’
प्रेमानंद महाराज बोले ‘अगर ऐसा नहीं करते तो मन को रोकने की सामर्थ्य किसी में नहीं है। जब आपकी उम्र 24-25 की हो और आप विवाह न करें तो आपका ब्रह्मचर्य रह पाना संभव नहीं है।’
प्रेमानंद महाराज के अनुसार ‘आज के समय में मोबाइल में जो चीजें देखी जा रही हैं या समाज की जो स्थिति है, उसे देखकर लंबे समय तक ब्रह्मचर्य रह पाना बिल्कुल भी संभव नहीं है।’
प्रेमानंद महाराज ने कहा ‘25 साल से अधिक आयु में यदि आपको ब्रह्मचर्य रहना है तो उसके लिए साधना चाहिए आध्यात्म की और वे है नहीं तो फिर मन गलत कामों की भागता है।’