ऑस्ट्रेलिया में खालिस्तान समर्थक तत्वों को खुली छूट है। खालिस्तानियों द्वारा ऑस्ट्रेलियाई हिंदुओं पर हाल ही में किया गया हमला इसका प्रमाण है। भारत सरकार द्वारा व्यक्त की गई चिंताओं के बावजूद खालिस्तान जनमत संग्रह आयोजित किया गया था। 

(गिरीश लिंगन्ना)। खालिस्तान समर्थक अलगाववादियों को 4 जून 2023 को एक झटका लगा जब पांच स्थानों ने तथाकथित 'सिडनी रेफरेंडम' के लिए अपने परिसर का इस्तेमाल करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया। इवेंट का आयोजन अंततः एक निर्माण स्थल पर किया गया। खालिस्तानियों ने दावा किया कि बड़ी संख्या में लोगों ने इसमें भाग लिया। कुछ हिंदुओं ने कार्यवाही को बाधित करने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम स्थल पर मौजूद पुलिस ने इन हिंदुओं को खदेड़ दिया और पूरे दिन मतदान शांतिपूर्वक चलता रहा। हालांकि सच्चाई यह है कि बहुत कम लोग इस रेफरेंडम के लिए आए थे। इसमें शामिल होने वाले ज्यादातर वही लोग थे जो मेलबर्न की एक रैली में शामिल हुए थे। इससे तनाव बहुत बढ़ गया था।

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मेलबर्न में तथाकथित 'पंजाब स्वतंत्रता जनमत संग्रह' खालिस्तानी कार्यकर्ताओं और भारत समर्थक प्रदर्शनकारियों के बीच झगड़ों के चलते समाप्त हो गया था। इसमें दो लोग घायल हो गए थे। कई सिखों को हिरासत में लिया गया था। ऑस्ट्रेलिया में अनिवासी सिख पंजाब में एक स्वतंत्र खालिस्तान बनाने के अपने अलगाववादी एजेंडे को हवा देने के लिए 'जनमत संग्रह' आयोजित कर रहे हैं।

ग्रिफिथ सिख खेलों के दौरान दिखाए गए भारत विरोधी झंडे

4 जून की घटना से एक सप्ताह पहले ऑस्ट्रेलियाई हिंदू समुदाय ने पुलिस और परिषद को सतर्क किया कि 10-11 जून को ग्रिफिथ सिख खेलों में भारत विरोधी झंडे लहराए जा सकते हैं। हिंदू विरोधी पोस्टर और नारे लगाए जा सकते हैं। परिषद को यह सुनिश्चित करने के लिए ऑस्ट्रेलियाई हिंदू चिंताओं के विवरण के साथ पत्र सौंपा गया था कि ऐसा कुछ भी नहीं हुआ क्योंकि यह एक सुरक्षा मुद्दा था।

परिषद और पुलिस ने चिंताओं को स्वीकार किया और उन्हें आश्वासन दिया कि ऐसा कुछ भी नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने उन्हें यह भी सलाह दी कि यदि हिंदू समुदाय के किसी सदस्य ने ऐसी चीजें देखीं तो उन्हें तुरंत पुलिस के पास इसकी शिकायत करनी चाहिए। 10 जून को ऑस्ट्रेलियाई हिंदू समुदाय ने ग्रिफिथ सिख खेलों में खालिस्तानी झंडे देखे और उनके सोशल मीडिया पेजों ने खालिस्तानी झंडे और पोस्टर के वीडियो भी पोस्ट किए। इसके बाद ऑस्ट्रेलियाई हिंदू समुदाय और ऑस्ट्रेलियाई हिंदू एसोसिएशन (एएचए) के सदस्यों ने एक बार फिर पुलिस के सामने चिंता जताई। लेकिन, हैरानी की बात यह है कि पुलिस ने उनकी परवाह नहीं की और उनकी चिंताओं को नजरअंदाज किया।

तिरंगा रैली पर हुआ हमला

इसके चलते ऑस्ट्रेलियाई हिंदू समुदाय ने 11 जून को तिरंगा रैली आयोजित करने की योजना बनाई। सुबह 8 बजे के आसपास ऑस्ट्रेलियाई हिंदू समुदाय ने ग्रिफिथ पुलिस स्टेशन में अपनी रैली का रूट दिया। तिरंगा रैली में करीब 25-28 कारें शामिल हुईं। करीब 30 हिंदू रैली में शामिल हुए। हर कार पर तिरंगा लगा था। बुलेवार्ड ग्रिफिथ में जिस जगह शहीदी टूर्नामेंट का आयोजन होना था वहां पांच कारों पर हमला किया गया। इस दौरान पुलिस बल तमाशबीन बनी रही। किसी हमलावर को गिरफ्तार नहीं किया गया। जब ऑस्ट्रेलियाई हिंदू समुदाय के लोग रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए ग्रिफिथ पुलिस स्टेशन पहुंचे तो पुलिस शुरू में कार्रवाई करने से हिचक रही थी। उल्टे यह पूछा कि तिरंगा रैली क्यों निकाली थी?