नई दिल्ली. पूर्वी लद्दाख में सीमा को लेकर जारी विवाद को निपटाने के लिए भारत और चीन के बीच कईं स्तर की बातचीत हो चुकी है। इसी बीच लद्दाख में जारी सीमा विवाद सुलझाने को लेकर इस हफ्ते भारत-चीन के बीच सैन्य और कूटनीतिक स्तर की वार्ता का आठवां दौर आयोजित होने की उम्मीद है।  हालांकि, चीन अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है, वह हर बार कोई ना कोई अडंगेबाजी लगा ही देता है। अब चीन ने शर्त रखी है कि भारतीय सेना पहले पैंगोंग झील के दक्षिणी किनारे पर कब्जे वाली चोटियों को खाली करे। इसे लेकर भारत ने साफ कर दिया है कि दोनों देशों की सेनाएं एक साथ ही हटेंगी। एकतरफा कार्रवाई नहीं होगी।

दरअसल, दोनों देशों के बीच मई-2020 से जारी सीमा विवाद अभी तक सुलझ नहीं पाया है। दोनों ही देश एक दूसरे को शक की निगाह से देख रहे हैं, जिस कारण सीमा पर हथियारों और जवानों की तैनाती बढ़ गई है। नई दिल्ली और बीजिंग के बीच सात दौर की वार्ता होने के बाद भी सीमा पर स्थिति सुलझी नहीं है। वहीं, एक बार फिर भारत और चीन सीमा विवाद को बातचीत के जरिए सुलझाने के लिए टेबल पर आने वाले हैं। 

नहीं बदले चीन के तेवर

अब तक भारत और चीन के बीच कोर कमांडर स्तर पर सात राउंड की बातचीत हो चुकी है। राजनीतिक स्तर पर भारत चीन के रुख को लेकर सतर्क है। हाल ही में रूस के मॉस्को में दोनों देशों के रक्षा मंत्री और विदेश मंत्री की बातचीत हुई थी। इसके बावजूद चीन के तेवर नहीं बदले। द इंडियन एक्सप्रेस से एक सूत्र ने कहा कि बीजिंग का कहना है कि वह दोनों देशों के बीच शांति और खुशहाली चाहता है। लेकिन भारत भी यही चाहता है। लेकिन चीन यह नहीं बताता कि उसने इतनी बड़ी संख्या में वहां सैनिक क्यों जमा किए। चीन पर विश्वास करना आसान नहीं है। हालांकि, भारत हर तरह से तैयार है। 

दोनों देशों में सैन्य स्तर पर संवाद जारी

सर्दियों और बर्फबारी के मद्देनजर दोनों ही सेनाओं ने 1,597 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर जवानों की तैनाती में वृद्धि करना शुरू कर दिया है। वरिष्ठ अधिकारियों की मानें तो दोनों देश विवाद वाली जगह से फिलहाल शांति बहाल करने के लिए राजी नहीं दिख रहे हैं, लेकिन उन्होंने सैन्य कमांडर और राजनयिक स्तरों पर संवाद जारी रखने का फैसला किया है। विवाद वाले स्थलों पर किसी भी तरह की विपरीत परिस्थिति को नहीं दोहराने के लिए भी बातचीत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।