अफगानिस्तान में पंजशीर उन चंद इलाकों में है जहां अभी तक तालिबान की एक न चली है। वह कभी इस क्षेत्र पर कब्जा नहीं जमा सका है। तालिबान लगातार इस क्षेत्र पर प्रभुत्व की कोशिश में लगा हुआ है।

काबुल। अफगानिस्तान में तालिबान के लिए इस बार भी पंजशीर राह में रोड़ा अटका रहा है। पहले पिता के हाथों के मात खाने के बाद अब इस बार बेटे से भी तालिबानी पार नहीं पा रहे हैं। तालिबान के कब्जे से बचे एकमात्र पंजशीर में लड़ाई खतरनाक मोड़ पर जाती दिख रही है। यहां कब्जे को लेकर तालिबान ने लड़ाई में अपने पचास लड़ाकों को खो चुका है जबकि 20 से अधिक को पंजशीर क्षेत्र में बंधक बना लिया गया है। 

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पंजशीर पर तालिबान कभी नहीं जमा सका है कब्जा

दरअसल, अफगानिस्तान में पंजशीर उन चंद इलाकों में है जहां अभी तक तालिबान की एक न चली है। वह कभी इस क्षेत्र पर कब्जा नहीं जमा सका है। तालिबान लगातार इस क्षेत्र पर प्रभुत्व की कोशिश में लगा हुआ है। हालांकि, यहां तालिबान कभी सफल नहीं हो सका है। 

पंजशीर घाटी अफगानिस्तान के 34 प्रांतों में से एक है। यहां 512 गांवों के साथ 7 जिलों है। 2021 तक पंजशीर प्रांत की जनसंख्या लगभग 173,000 थी। पंजशीर को पंजशेर भी कहते हैं, जिसका मतलब है पांच शेरों की घाटी। ये 1970 और 1980 के दशक में सोवियत के सामने टिका रहा, यानी तब भी इसे जीता नहीं जा सका। अब ये तालिबान विरोधी मोर्चे का केंद्र बन गया है। 

पंजशीर में नाॅदर्न अलायंस है सक्रिय

नाॅदर्न अलायंस सैनिकों का एक मोर्चा है, जिसे 1960 में तालिबान का मुकाबला करने के लिए तैयार किया गया था। इसे ईरान, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान जैसे देशों का समर्थन था। 1996 और 2001 के बीच तालिबान को पूरे देश पर कब्जा करने से रोकने में नॉर्दन अलॉयंस की महत्वपूर्ण भूमिका थी।

तालिबानी कमांडर भी मारा गया

सोमवार को यहां हुई लड़ाई में तालिबान के क्षेत्रीय कमांडर के मारे जाने का दावा भी किया गया है। इसके अलावा 50 के करीब तालिबानी मारे गए हैं जबकि 20 से अधिक को बंधक बनाया गया है। वहीं, पंजशीर समर्थक एक लड़ाके की मौत हुई है और 6 घायल हुए हैं। 

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