Chankya Niti: ये चीजें अंतिम समय तक मनुष्य के साथ रहती हैं, कभी नहीं देती धोखा

Published : Aug 14, 2021, 09:53 AM ISTUpdated : Aug 14, 2021, 10:10 AM IST
Chankya Niti: ये चीजें अंतिम समय तक मनुष्य के साथ रहती हैं, कभी नहीं देती धोखा

सार

आचार्य चाणक्य (Chankya) ने अर्थशास्त्र की रचना की थी। आचार्य चाणक्य (Chankya) की नीतियां (Chankya Niti) आज के समय में भी बहुत प्रासंगिक हैं। नीतिशास्त्र की शिक्षाएं भले ही कठोर लगती हैं लेकिन ये आपको जीवन में सही राह दिखाती हैं। इनकी शिक्षा अनमोल है।

उज्जैन. आचार्य चाणक्य (Chankya) भारत के सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य (Chandra Gupta Mourya) के महामंत्री थे। उन्होंने तक्षशिला विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की थी और बाद में वहीं अध्यापक के रूप में विद्यार्थियों को शिक्षा भी प्रदान की। आचार्य चाणक्य (Acharya Chanakya) ने अपने जीवन में हर परिस्थिति का सामना किया था इसलिए किताबी विषयों का ज्ञान होने के साथ ही व्यवहारिक जीवन का भी बहुत अनुभव था। अपने अनुभव, ज्ञान और गहन अध्ययन को मानव कल्याण के लिए इन्होंने ग्रंथों के रुप में पिरोया है। आचार्य चाणक्य (Chankya) के द्वारा लिखित नीतिशास्त्र में जीवन से जुड़े विभिन्न पहलुओं धन, समाज, रिश्ते, निजी जीवन, कार्यक्षेत्र आदि के संबंध में महत्वपूर्ण बातें बताई गई हैं। इन बातों को ध्यान में रखकर व्यक्ति सुखी, समृद्ध और संतुष्ट जीवन जी सकता है। आचार्य चाणक्य नें ऐसी चीजों के बारे में बताया है जो मनुष्य का साथ अंतिम समय तक देती हैं। आगे जानिए इनके बारे में…

सच्चा साथी है ज्ञान, सदा साथ रहता है
आचार्य चाणक्य (Acharya Chanakya) के अनुसार, जो व्यक्ति अपने घर से दूर परदेस में रहता है उसका सबसे सच्चा साथी ज्ञान होता है। ज्ञान ही व्यक्ति को विषम परिस्थितयों से बाहर निकालता है और अंतिम समय तक साथ निभाता है, इसलिए व्यक्ति को अपने जीवन में ज्ञान के महत्व के समझना चाहिए और जहां भी जैसे भी ज्ञान मिले अर्जित करना चाहिए।

रोग के समय औषधि सच्ची साथी
किसी भी रोगी मनुष्य की सच्ची मित्र औषधि होती है। दवाएं ही मनुष्य को बड़े से बड़े रोग से निकालती हैं और जीवन रक्षक होती हैं, इसलिए मनुष्य को कभी भी दवा लेने में लापरवाही नहीं करनी चाहिए।

धर्म रहता है सदैव साथ
मनुष्य का सच्चा साथी धर्म होता है। धर्म व्यक्ति को सही और गलत का निर्णय करने की क्षमता प्रदान करता है। धर्म पर चलने वाला व्यक्ति सदैव सत्कर्मों की ओर प्रेरित होता है। धर्म अंत समय तक व्यक्ति के साथ रहता है। धर्म पर चलने वाले व्यक्ति जीवनभर और मृत्यु के बाद भी सम्मान प्राप्त करते हैं, इसलिए मनुष्य के सदैव धर्म का पालन करना चाहिए।

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