Mahabharat: मुखिया पर टिका होता है परिवार का भविष्य, उसकी एक गलती सबकुछ बर्बाद कर सकती है

Published : Aug 06, 2021, 11:57 AM ISTUpdated : Aug 06, 2021, 12:04 PM IST
Mahabharat: मुखिया पर टिका होता है परिवार का भविष्य, उसकी एक गलती सबकुछ बर्बाद कर सकती है

सार

वर्तमान समय में परिवार (Family) के लोगों में सामंजस्य आसानी से नहीं बैठ पाता। इसके कई कारण हो सकते हैं जैसे- एक-दूसरे से सोच न मिलना, परिवार की जिम्मेदारियों को लेकर मनमुटाव, जनरेशन गेप आदि। ऐसे मामलों में अंतत: एक परिवार अनेक परिवारों में बंट जाता है। इसका असर आने वाली पीढ़ी (Generation) पर पड़ता है। बच्चे संयुक्त परिवार के प्यार से वंचित रह जाते हैं। अगर कुछ बातों का ध्यान रखा जाए तो परिवार में सामंजस्य बनाया जा सकता है।  

उज्जैन. परिवार में मुखिया का पद सबसे महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि उन्हीं के फैसलों का सम्मान सभी को करना पड़ता है। कई बार मुखिया के गलते फैसले के कारण परिवार के अन्य लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसलिए मुखिया का जिम्मेदारी बहुत बढ़ जाती है।

मुखिया पर टिका होता है परिवार का भविष्य
घर का मुखिया सिर्फ परिवार ही नहीं चलाता है, उसके कर्मों पर ही परिवार का भविष्य टिका होता है। मुखिया का एक गलत निर्णय परिस्थितियों को पूरी तरह विपरीत कर सकता है। परिवार का मुखिया पंक्ति में खड़े पहले व्यक्ति की तरह होता है। जो जैसा खड़ा होता है, कतार में शेष लोग भी वैसे ही खड़े होते हैं। अगर आप पंक्ति में पहले खड़े हैं तो सावधान हो जाइए। परिवार चलाना भी ऐसा ही काम है।

इस उदाहरण से समझें
- युधिष्ठिर परिवार के मुखिया थे। महाभारत में उन्हें धर्मराज भी कहा गया है, जिसका अर्थ है कि वे धर्म का विशेष ज्ञान रखते थे, लेकिन इसके बाद भी उन्होंने एक बहुत बड़ी गलती कर दी, जिसके कारण पांडवों को वनवास जाना पड़ा और दु:ख भोगने पड़े।
- जुआ खेलने की लत सिर्फ युधिष्ठिर को थी। दुर्योधन से जुआ भी उन्होंने अकेले ही खेला। लेकिन परिणाम सबने भुगता। द्रौपदी का चीरहरण हो गया। पांचों भाइयों को वन में जाना पड़ा। राजपाठ हाथ से चला गया। इंद्रप्रस्थ भी दुर्योधन ने जीत लिया।

लाइफ मैनजेमेंट (Life Management)
यदि आप परिवार के मुखिया हैं तो आपकी जिम्मेदारी भी ज्यादा है। निजी आनंद, निजी स्वार्थ के लिए कोई ऐसा काम ना करें, जिसका परिणाम पूरे परिवार को भुगतना पड़े। जब भी कोई निर्णय लें तो यह सोच कर लें कि उसका परिणाम आपके पूरे परिवार को भुगतना पड़ सकता है। कभी भी सिर्फ निजी शौक या हित के लिए ही कोई काम ना करें। हमेशा दूरदृष्टि का उपयोग करें।

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