Nagpanchami 2022: क्या आप जानते हैं नागों को उनकी ही माता ने भस्म होने का श्राप क्यों दिया था?

Published : Jul 24, 2022, 12:55 PM IST
Nagpanchami 2022: क्या आप जानते हैं नागों को उनकी ही माता ने भस्म होने का श्राप क्यों दिया था?

सार

धर्म ग्रंथों के अनुसार, श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नागपंचमी (Nagpanchami 2022) का पर्व मनाया जाता है। इस बार ये पर्व 2 अगस्त, मंगलवार को है। इस दिन नागदेवता की पूजा विशेष रूप से की जाती है। हमारे धर्म ग्रंथों में नागों से जुड़ी कई कथाएं पढ़ने को मिलती हैं।

उज्जैन. नागों की उत्पत्ति कैसे हुई और वे किसकी संतान हैं? इसके बारे में महाभारत आदि ग्रंथों में बताया गया है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार धरती के अंदर नागलोक है, जहां शक्तिशाली नाग निवास करते हैं और परम शक्तिशाली शेषनाग ने अपने फन पर ही धरती को धारण किया हुआ है। और भी कई कथाएं और मान्यताएं नागों को लेकर हमारे समाज में प्रचलित हैं। आज हम आपको बता रहे हैं नागों की उत्पत्ति कैसे हुई…

ऐसे हुई नाग वंश की उत्पत्ति
महाभारत के अनुसार, महर्षि कश्यप की कई पत्नियां थीं, उनमें से एक का नाम कद्रू था। प्रसन्न होकर एक बार महर्षि कश्यप ने कद्रू को एक हजार तेजस्वी नागों की माता होने का वरदान दिया। उसी के फलस्वरूप नाग वंश की उत्पत्ति हुई।महर्षि कश्यप की एक अन्य पत्नी भी थी, जिसका नाम विनता था। पक्षीराज गरुड़ विनता के ही पुत्र हैं। एक बार कद्रू और विनता ने एक सफेद घोड़े को देखकर शर्त लगाई। कद्रू ने कहा इस घोड़े की पूंछ काली है और विनता ने कहा कि सफेद। 

जब नागमाता ने दिया नागों को भस्म होने का श्राप
शर्त जीतने के लिए कद्रू ने अपने नाग पुत्रों से कहा कि वे अपना आकार छोटा कर घोड़े की पूंछ से लिपट जाएं, जिससे उसकी पूंछ काली नजर आए। कुछ सर्पों ने ऐसा करने से मना कर दिया। क्रोधित होकर कद्रू ने अपने पुत्रों को यज्ञ में भस्म होने का श्राप दे दिया। श्राप के डर से बहुत से नाग घोड़े की पूंछ से लिपट गए, जिससे उस घोड़े की पूंछ काली दिखाई देने लगी। शर्त हारने के कारण विनता कद्रू की दासी बन गई।

इसलिए नागों की जीभ के हो गए दो टुकड़े
जब विनता के पुत्र गरुड़ पैदा हुए तो अपनी माता को दासी के रूप में देखकर उन्हें बहुत दुख हुआ। माता को दासत्व से मुक्त करने के लिए कद्रू ने उनसे स्वर्गलोक जाकर अमृत लाने को कहा। गरुड़देव ने ऐसा ही किया और अमृत लाकर कुशा नामक घास पर रख दिया। अमृत पीने से पहले जब नाग स्नान करने गए तभी देवराज इंद्र उस अमृत कलश को उठाकर पुन: स्वर्ग लोक ले गए। नागों ने जब ये देखा तो उन्होंने उस घास को चाटना शुरू कर दिया जिस पर अमृत कलश रखा था। कुशा की धार से उनकी जीभ के दो टुकड़े हो गए। 

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