रंगपंचमी से शुरू हुआ बुखार, पहले तो घर पर ही करते रहे इलाज; लेकिन जब 7वें दिन चेक की ऑक्सीजन तो उड़ गए होश..

Published : May 25, 2021, 06:30 AM IST
रंगपंचमी से शुरू हुआ बुखार, पहले तो घर पर ही करते रहे इलाज; लेकिन जब 7वें दिन चेक की ऑक्सीजन तो उड़ गए होश..

सार

भोपाल। कोरोना से पूरी दुनिया खौफ के साए में जीने को मजबूर है। इस जानलेवा वायरस की दूसरी लहर से देशभर में अब तक लाखों लोग काल के गाल में समा चुके हैं। शहर ही नहीं, बल्कि इस बार तो वायरस ने गांवों में भी कहर बरपाया है। कोरोना की वजह से अब भी लाखों लोग अस्पतालों में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं। हालांकि कई लोग ऐसे भी हैं, जिन्होंने अपनी पॉजिटिविटी और जीवटता से इस वायरस को मात दी है। इन्हीं में से एक हैं भोपाल के रहने वाले ज्ञान प्रकाश श्रीवास्तव, जिन्होंने 48 साल की उम्र में 10 दिनों तक कोरोना से जंग लड़ी और उसे हराकर अब पूरी तरह स्वस्थ हो चुके हैं। 

भोपाल। कोरोना से पूरी दुनिया खौफ के साए में जीने को मजबूर है। इस जानलेवा वायरस की दूसरी लहर से देशभर में अब तक लाखों लोग काल के गाल में समा चुके हैं। शहर ही नहीं, बल्कि इस बार तो वायरस ने गांवों में भी कहर बरपाया है। कोरोना की वजह से अब भी लाखों लोग अस्पतालों में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं। हालांकि कई लोग ऐसे भी हैं, जिन्होंने अपनी पॉजिटिविटी और जीवटता से इस वायरस को मात दी है। इन्हीं में से एक हैं भोपाल के रहने वाले ज्ञान प्रकाश श्रीवास्तव, जिन्होंने 48 साल की उम्र में 10 दिनों तक कोरोना से जंग लड़ी और उसे हराकर अब पूरी तरह स्वस्थ हो चुके हैं। 

Asianetnews Hindi के गणेश कुमार मिश्रा ने भोपाल में रहने वाले ज्ञान प्रकाश श्रीवास्तव और उनके परिजनों से बात की। इस दौरान उन्होंने बताया कि आखिर उनसे कहां चूक हुई और कैसे वो इस खतरनाक कोरोना वायरस की चपेट में आए। लक्षण आने के बाद उन्होंने आखिर क्या उपाय किए और किस तरह इस वायरस से लड़ाई लड़कर ठीक हुए, इसका पूरा वाकया हमारे साथ साझा किया है। 

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रंगपंचमी के अगले दिन से ही आने लगा था बुखार : 
ज्ञान प्रकाश श्रीवास्तव के मुताबिक, 2 अप्रैल को रंगपंचमी थी। इस मौके पर हमने आस-पड़ोस और जान-पहचान वालों के साथ जमकर रंग-गुलाल उड़ाया। इसके अगले दिन से मुझे हल्का-हल्का बुखार आने लगा, तो मैंने सोचा कि त्योहार पर पानी और रंग खेलने की वजह से ऐसा हुआ होगा। हालांकि बुखार कम होने का नाम नहीं ले रहा था। ऐसे में मैंने घर पर ही बुखार की टेबलेट खाई, जिससे कुछ आराम मिला। 

दवा का असर खत्म होते ही हावी होने लगता था फीवर :  
एक-दो दिन तक लगातार बुखार आता रहा। दवाई खाने पर उतर जाता, लेकिन जैसे ही दवा का असर खत्म होता, बुखार वापस अपने रंग में आ जाता। चूंकि कोरोना के बारे में तो पहले से ही सुन रखा था, इसलिए हम फौरन बाजार से थर्मामीटर और ऑक्सीमीटर ले आए, ताकि बुखार और ऑक्सीजन लेवल को ऑब्जर्व करते रहें। इसके साथ ही घर पर देसी इलाज यानी काढ़ा और हल्दी-दूध वगैरह लेता रहा, लेकिन बुखार खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा था। इसी बीच, मेरी छोटी बेटी को भी बुखार आने लगा। जब उसका टेस्ट कराया तो वो पॉजिटिव निकली। 

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जब ऑक्सीजन लेवल देख उड़ गए होश : 
कोरोना की शंका तो अब मुझे भी थी, लेकिन अस्पताल के डर से घर पर ही इलाज करते रहे और इस तरह करीब 7 दिन बीत चुके थे। लेकिन बुखार अब भी नहीं जा रहा था। फिर 9 अप्रैल को दोपहर में मैंने ऑक्सीजन चेक की तो ऑक्सीमीटर में नंबर देख मेरे होश उड़ गए। उस वक्त मेरा ऑक्सीजन लेवल 85 पहुंच चुका था और मुझे सांस लेने में भी तकलीफ होने लगी थी। इसके बाद मैंने फौरन जाकर CT स्कैन कराया। रिपोर्ट आई तो मेरे फेफड़ों में इन्फेक्शन हो चुका था। डायग्नोस्टिक सेंटर वाले ने कहा- आपको ऑक्सीजन की जरूरत है, एडमिट होना पड़ेगा। 

जब मिला ऑक्सीजन मास्क, तब आई जान में जान : 
10 अप्रैल को मैं घर के पास ही एक अस्पताल में एडमिट हो गया। यहां सबसे पहले मुझे ऑक्सीजन लगाई गई, तब जाके मेरी सांस में सांस आई। अस्पताल में एक बड़े से हॉल में ढेर सारे मरीजों को देख मैं घबरा गया था। ऊपर से वहां पर बाहर से किसी को भी मिलने की इजाजत नहीं थी। सिर्फ घर से बना हुआ खाना आता था, जिसे हम तक पहुंचा दिया जाता था। 

रात को नहीं आती थी नींद, एक अनजान-सा डर सताता रहता था : 
चूंकि अस्पताल में किसी से मिलने नहीं दिया जाता था। ऐसे में घर से बिल्कुल दूर और अलग रहते हुए मुझे रात को नींद नहीं आती थी। हमेशा एक अनजान सा डर सताता रहता था। सोचता रहता था कि क्या होगा? क्या मैं ठीक होकर घर वापस जा पाऊंगा? पूरी रात खुली आंखों में निकल जाती थी। दिन तो किसी तरह कट भी जाता था, लेकिन रात को अजीब-सी बेचैनी महसूस होती थी। 

10 दिनों तक डॉक्टर्स के ऑब्जर्वेशन में रहा : 
मैं करीब 10 दिनों तक अस्पताल में डॉक्टरों के ऑब्जर्वेशन में रहा। प्राइवेट अस्पताल के बारे में हमेशा नेगेटिव बातें सुन रखी थीं, लेकिन यहां वैसा कुछ भी देखने को नहीं मिला। अस्पताल में डॉक्टर्स से लेकर नर्सों ने भी अच्छे से केयर की। टाइम पर दवाइयां देने से लेकर इंजेक्शन तक सबकुछ सही समय पर मिलता था। प्राइवेट अस्पताल में पैसा जरूर खर्च हुआ, लेकिन इलाज में किसी भी तरह की कोई कमी या कोताही नहीं बरती गई। ये सब देखकर प्राइवेट अस्पतालों को लेकर मेरा नजरिया भी बदल गया।

 

घर तो आ गया, लेकिन मुसीबत अभी खत्म नहीं हुई थी : 
20 अप्रैल को मैं डिस्चार्ज होकर घर आ गया। हालांकि, अब मैं ये सोच रहा था कि पूरी तरह ठीक हो चुका हूं। लेकिन कार से उतरकर घर के अंदर तक जाने में ही मेरी सांस फूलने लगी। थोड़ा-सा भी चलूं तो मेरी सांस फूलने लगती। ये सब देखकर मुझे लगा कि मैं अभी पूरी तरह ठीक नहीं हुआ था और जल्दी छुट्टी कराकर घर आ गया। मुझे अभी कुछ दिन और अस्पताल में रहना था। 

घरवालों और पड़ोसियों ने बढ़ाया हौसला, दी हिम्मत : 
घर में पड़े-पड़े मैं सोचता था कि अस्पताल में बेड पर पड़ा रहता था और यहां पर भी वही। न ज्यादा चल फिर सको, न छत पर जा सको। ये सोच-सोचकर मेरे अंदर नेगेटिविटी आने लगी थी। फिर मेरी पत्नी और बेटियों ने मुझे हौसला दिया और कहा- इस बीमारी के बाद शरीर में बहुत ज्यादा कमजोरी आ जाती है, जो धीरे-धीरे जाएगी। आपको चिंता करने की जरूरत नहीं है। पड़ोसियों ने भी कहा कि अच्छा और हेल्दी खाना खाइए, हफ्तेभर में आप सीढ़ियां चढ़ने लगेंगे। 

भगवान के दर्शन और प्रकृति के बीच गुजारा वक्त : 
परिवार और पड़ोसियों की हिम्मत और खुद पर भरोसे के बलबूते हफ्तेभर में मेरी ये दिक्कत ठीक हो गई। इसके बाद मैं छत पर जाकर पेड़-पौधों के बीच खुली हवा में वक्त बिताने लगा। प्रकृति के करीब जाकर ऐसा लगा, जैसे कोई बीमारी थी ही नहीं। मेरे घर के सामने ही मंदिर और पार्क है। शाम को कुछ वक्त के लिए मंदिर में भगवान के दर्शन करने लगा और थोड़ी देर पार्क में टहलता। इस तरह नेचर के बीच वक्त बिताने से मैं तेजी से रिकवर होने लगा। 

अफवाहों और वाट्सएप से रहें दूर, छूमंतर हो जाएगा कोरोना : 
इधर-उधर की बातों और अफवाहों पर ध्यान न दें, इससे नकारात्मकता बढ़ती है। कुछ दिनों के लिए वाट्सएप, फेसबुक और टीवी से दूर हो जाएं। खुद को पॉजिटिव रखने के लिए ज्यादा से ज्यादा वक्त प्रकृति के बीच गुजारें, अपनी पसंद की चीजें करें। कोरोना छूमंतर हो जाएगा...। 

Asianet News का विनम्र अनुरोधः आइए साथ मिलकर कोरोना को हराएं, जिंदगी को जिताएं...जब भी घर से बाहर निकलें माॅस्क जरूर पहनें, हाथों को सैनिटाइज करते रहें, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें। वैक्सीन लगवाएं। हमसब मिलकर कोरोना के खिलाफ जंग जीतेंगे और कोविड चेन को तोडेंगे।#ANCares #IndiaFightsCorona

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