
बिजनेस डेस्क। 1 फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) वित्त वर्ष 2021-22 का बजट पेश करेंगी। इस बजट में इनकम टैक्स में बहुत ज्यादा राहत दिए जाने की उम्मीद नहीं है। वहीं, ज्यादा इनकम वाले लोगों पर कोरोना सेस (Covid-19 Cess) लगाया जा सकता है। हालांकि, आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80C के तहत कुछ प्रावधानों में टैक्स लिमिट को बढ़ा सकती है। इससे लोगों को कुछ राहत मिल सकती है। बता दें कि पिछले बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 24.23 लाख करोड़ रुपए के कुल टैक्स रेवेन्यू का अनुमान रखा था। ऐसा माना जा रहा है कि यह लक्ष्य 3 लाख करोड़ रुपए कम रह सकता है।
2 लाख रुपए हो सकती है सेक्शन 80C की सीमा
फाइनेंस एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस बजट में सरकार इनकम टैक्स के सेक्शन 80C के तहत छूट की सीमा 1.5 लाख रुपए से बढ़ा कर 2 लाख रुपए कर सकती है। वैसे, यह उम्मीद की जा रही थी कि सरकार इसे 3 लाख रुपए तक करेगी। वहीं, सरकार अपना रेवेन्यू बढ़ाने के लिए ज्यादा आमदनी वाले लोगों पर कोरोना सेस भी लगा सकती है। काफी ज्यादा इनकम वाली कैटेगरी पर कॉरपोरेट टैक्स भी लग सकता है। फिलहाल सबसे ज्यादा इनकम टैक्स रेट 30 फीसदी है।
पर्सनल इनकम टैक्स की दर में कमी
यह भी अनुमान जताया जा रहा है कि सरकार पर्सनल इनकम टैक्स की अधिकतम दर में कमी कर सकती है। यह 25 फीसदी किया जा सकता है, जो फिलहाल 30 फीसदी है। इस पर 3 फीसदी एजुकेशन सेस और 1 फीसदी हेल्थकेयर सेस लगता है। कहा जा रहा है कि इस टैक्स में कटौती करने ले जीडीपी का अनुपात बढ़ेगा। यह अभी 17 फीसदी है, जबकि चीन और ब्राजील जैसे देशों में इसका औसत 21 फीसदी है।
नोशनल रेंट पर हट सकता है टैक्स
इनकम टैक्स के सेक्शन 23 (5) के तहत अनसोल्ड प्रॉपर्टी अगर किराए पर नहीं लगी हो तो कम्पलीशन सर्टिफिकेट मिलने के बाद 2 साल तक उसकी वैल्यू को शून्य माना जाता है। इसके बाद यह माना जाता है कि प्रॉपर्टी के मालिक को इससे आमदनी हो रही है और उस पर टैक्स लगाया जाता है। लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस बजट में सरकार इस प्रावधान को खत्म कर सकती है या छूट की अवधि को 2 साल से बढ़ा कर 5 साल कर सकती है।
होम लोन पर बढ़ सकती है छूट
इस बजट में सरकार होम लोन के ब्याज पर मौजूदा 2 लाख रुपए की छूट को बढ़ा कर 3 लाख रुपए कर सकती है। यह छूट इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 24 के तहत मिलती है। अगर मकान किराए पर लगा है, तो पूरे ब्याज पर डिडक्शन मिल जाता है, भले ही वह रकम 2 लाख रुपए से ज्यादा हो।
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