चीन के तीन बैंकों ने अनिल अंबानी के खिलाफ इस मामले में लंदन कोर्ट में दर्ज कराया मुकदमा

Published : Nov 09, 2019, 01:23 PM ISTUpdated : Nov 09, 2019, 03:05 PM IST
चीन के तीन बैंकों ने अनिल अंबानी के खिलाफ इस मामले में लंदन कोर्ट में दर्ज कराया मुकदमा

सार

 रिलायंस ग्रुप के मुखिया अनिल अंबानी पर चीन के तीन बैंकों ने पैसे के लेनदेन मामले पर लंदन कोर्ट में केस दर्ज कराया है। रिलायंस कम्युनिकेशन ने साल 2012 में समझौते के तहत 65 हजार करोड़ रुपए के लोन लिए थे।  

नई दिल्ली. एशिया के सबसे अमीर कारोबारी मुकेश अंबानी के भाई और रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन अनिल अंबानी के खिलाफ चीन के तीन बैंकों ने 680 मिलियन डॉलर के लेन देन मामले में लंदन कोर्ट में केस दर्ज कराया है। साल 2012 में रिलायंस कम्युनिकेशन लिमेटेड ने चीन के औद्योगिक और वाणिज्यिक बैंक लिमिटेड, चीन विकास बैंक और चीन के निर्यात-आयात बैंक से करीब 625.2 मिलियन डॉलर का कर्ज लिया था।

पॉवर ऑफ अटॉर्नी पर फंसा पेंच

ICBC के वकील बंकिम थांकी का कहना है कि अनिल अंबानी की ओर से रिलायंस के कमर्शियल एवं ट्रेजरी हेड हसित शुक्ला ने निजी गारंटी पर हस्ताक्षर किए थे। जबकि, दूसरे पक्ष के वकील हॉव का कहना है कि अनिल अंबानी ने अपनी ओर से शुक्ला को हस्ताक्षर का अधिकार नहीं दिया था।

भाई मुकेश अंबानी ने जेल जाने से बचाया था 

बता दें कि इसी साल अनिल अंबानी के स्वामित्व वाली रिलायंस कम्युनिकेशन का एरिक्सन कंपनी को 5.5 बिलियन डॉलर की राशि वापस न कर पाने के कारण दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश से जेल जाने की नौबत आ गई थी। हालाकि तब बड़े भाई मुकेश अंबानी ने पैसे को जमा कर उनको जेल जाने से बचाया लिया था। 

दोनों ने भाईयों का बंटवारा

साल 2002 में पिता धीरूभाई अंबानी के निधन के बाद अनिल और मुकेश अंबानी ने कारोबार में बंटवारा कर लिया था। मुकेश के पास वर्तमान में 56 बिलियन डॉलर की संपत्ति है। वे एशिया के सबसे अमीर कारोबारी हैं। दुनिया के 14वें सबसे अमीर कारोबारी हैं। कभी सबसे अमीर कारोबारी के इस लिस्ट में अनिल भी शामिल हुआ करते थे, लेकिन अब वो कर्ज के ढेर में दबे हुए हैं। ब्लूमबर्ग ने सितंबर में जारी अपने रिपोर्ट में बताया था कि अनिल के फोन कंपनी को छोड़ चार बड़े यूनिटों पर कुल 939 बिलियन रुपए का कर्ज है। 

गुरुवार को अदालत की सुनवाई के दौरान  ICBC के वकीलों ने न्यायाधीश डेविड वाक्समैन से कहा कि वे अंबानी को एक सशर्त आदेश दें कि वे समझौते के तहत बकाया राशि और ब्याज का भुगतान करें। हालाकि अंबानी ने अपनी संपत्ति का कोई सबूत देने से इनकार कर दिया। 
 

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