
ITR Filing Deadline 2026: अगर आपने अभी तक इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल नहीं किया है, तो अब इंतजार करना भारी पड़ सकता है। आम टैक्सपेयर्स के लिए आईटीआर भरने की आखिरी तारीख 31 जुलाई 2026 है और अब सिर्फ आखिरी 48-72 घंटे बचे हैं। कई लोग सोचते हैं कि डेडलाइन निकल भी गई तो 5,000 रुपए की लेट फीस देकर मामला खत्म हो जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं है। लेट फीस सिर्फ एक हिस्सा है। अगर ITR में गलती हुई, कोई इनकम छूट गई या ई-वेरिफिकेशन नहीं किया, तो बाद में टैक्स डिमांड, ब्याज, नोटिस और रिफंड में देरी जैसी परेशानियों का सामना भी करना पड़ सकता है। इसलिए आखिरी समय तक इंतजार करने के बजाय अभी अपना रिटर्न पूरा करना बेहतर रहेगा।
31 जुलाई के बाद भी आप 31 दिसंबर 2026 तक बिलेटेड ITR फाइल कर सकते हैं, लेकिन इसके लिए लेट फीस देनी होगी। सालाना इनकम 5 लाख रुपए से ज्यादा है, तो 5,000 रुपए तक लेट फीस लगेगी। वहीं, सालाना कमाई 5 लाख तक है, तो 1,000 लेट फीस देनी पड़ेगी। लेकिन सिर्फ लेट फीस ही चिंता की बात नहीं है। अगर टैक्स बकाया है तो उस पर ब्याज भी लग सकता है। गलत जानकारी देने पर टैक्स डिपार्टमेंट स्पष्टीकरण भी मांग सकता है।
अब इनकम टैक्स विभाग सिर्फ आपके दिए गए आंकड़ों पर भरोसा नहीं करता। AI, डेटा एनालिटिक्स और अलग-अलग सरकारी रिकॉर्ड की मदद से बैंक अकाउंट, TDS, शेयर, म्यूचुअल फंड, प्रॉपर्टी, विदेशी यात्रा और दूसरी फाइनेंशियल जानकारी का मिलान किया जाता है। अगर आपकी ITR और उपलब्ध डेटा में अंतर मिलता है, तो आगे परेशानी बढ़ सकती है।
सिर्फ Form-16 ही सबकुछ नहीं है
बहुत से नौकरीपेशा लोगों को लगता है कि ऑफिस से फॉर्म 16 मिल गया, बस काम खत्म! ऐसा नहीं है। आपकी FD का ब्याज, सेविंग अकाउंट, किराये से होने वाली कमाई या किसी भी पार्ट-टाइम काम (फ्रीलांस) की कमाई को भी ITR में बताना जरूरी है।
गलत ITR फॉर्म मत चुनना
अगर गलत फॉर्म भर दिया, तो सरकार मान लेगी कि आपने रिटर्न भरा ही नहीं। सैलरी वालों के लिए ITR-1 होता है। अगर घर बेचा है या शेयर बाजार से कैपिटल गेन हुआ है तो ITR-2 चुनें। वहीं, बिजनेस या ट्रेडिंग करने वालों के लिए ITR-3 और ITR-4 होते हैं।
डेटा का मिलान (AIS, TIS, 26AS)
रिटर्न सबमिट करने से पहले अपना फॉर्म 26AS और AIS (एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट) जरूर डाउनलोड करें। इसमें आपकी पूरी कमाई का रिपोर्ट कार्ड होता है। अगर आपकी दी गई जानकारी और पोर्टल के डेटा में अंतर हुआ, तो विभाग आपसे पूछताछ कर सकता है।
पुरानी कंपनी की सैलरी न भूलें
अगर इस साल आपने नौकरी बदली है, तो दोनों कंपनियों (पुरानी और नई) की सैलरी को जोड़कर ही रिटर्न भरें। नहीं तो बाद में एकमुश्त भारी टैक्स चुकाना पड़ सकता है।
बैंक खाते की एकदम सही जानकारी
अपना अकाउंट नंबर और IFSC कोड दो बार चेक करें। अगर रिफंड आना हुआ और आपने एक नंबर भी गलत लिख दिया, तो आपके पैसे अटक जाएंगे।
ब्याज की कमाई पर टैक्स
बैंक FD, RD और सेविंग खाते का ब्याज भी टैक्सेबल होता है। सिस्टम को सब पता है, इसलिए इसे जरूर डिक्लेयर करें।
शेयर और म्यूचुअल फंड का हिसाब
आपका पैन कार्ड डीमैट खाते से जुड़ा है। इसलिए शेयर बेचने या म्यूचुअल फंड से होने वाले फायदे या नुकसान की पूरी जानकारी ईमानदारी से दें।
हवा में छूट न मांगें
80C, 80D (हेल्थ इंश्योरेंस) या होम लोन के ब्याज पर छूट तभी लें जब आपके पास उनके असली कागज हों। विभाग कभी भी आपसे इन दस्तावेजों की मांग कर सकता है।
विदेशी निवेश का खुलासा
अगर आपने किसी विदेशी कंपनी के शेयर जैसे ऐपल, गूगल या ETF खरीदे हैं, तो इसका जिक्र ITR में जरूर करें।
ई-वेरिफिकेशन
फॉर्म सबमिट कर दिया, लेकिन उसे OTP या नेट बैंकिंग से वेरीफाई (E-verify) नहीं किया, तो आपका ITR रद्दी के बराबर है। इसे तुरंत करें।
डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल सिर्फ सामान्य जानकारी के लिए है। टैक्स से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) या टैक्स एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
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