
G20 Summit 2023: जी-20 शिखर सम्मेलन 8 से 10 सितंबर के बीच दिल्ली में आयोजित किया जाएगा। इसके लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। सम्मेलन के दौरान विदेशी मेहमान बेहद करीब से भारतीय संस्कृति और परंपरा की झलक देखेंगे। इस दौरान G-20 के कल्चर कॉरिडोर में रखने के लिए ऋग्वेद की सबसे पुरानी पांडुलिपि भी मंगवाई गई है। बता दें कि ऋग्वेद की सबसे पुरानी पांडुलिपि पुणे के एक संग्रहालय में रखी हुई है।
विश्व का सबसे प्राचीन ग्रंथ है ऋग्वेद
ऋग्वेद दुनिया का सबसे प्राचीन ग्रंथ है। कहा जाता है कि ये खुद ईश्वर की वाणी है, जिसे ऋषि-मुनियों को सुनाया गया। कुल 4 वेद हैं, जिनमें ऋग्वेद सबसे पुराना है। सामान्य तौर पर देखें तो वेद का मतलब ‘ज्ञान’ से है। ऋग्वेद में पुरातन ज्ञान-विज्ञान का भंडार है, जिसमें मानव कल्याण के बारे में बताया गया है। वेद इसलिए भी सबसे महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि ये मानव द्वारा लिखित नहीं, ईश्वर द्वारा ऋषियों को सुने ज्ञान के आधार पर लिखे गए हैं। यही वजह है कि वेदों को ‘श्रुति’ कहा जाता है।
ऋग्वेद के 10 अध्याय में 1028 सूक्त
ऋग्वेद विश्व का सबसे पहला वेद है, जो पद्यात्मक है। इसमें इंद्र, अग्नि, रुद्र,मरुत, सवित्रु ,सूर्य,वरुण और अश्विनी कुमारों की स्तुति है। ऋग्वेद के 10 अध्याय में 1028 सूक्त में 11 हजार मंत्र है। ऋग्वेद में करीब 125 ऐसी औषधियों का उल्लेख है, जो 107 स्थानों पर पाई जाती हैं। ऋग्वेद की 5 शाखाएं हैं, जिनके नाम शाकल्प, वास्कल, अश्वलायन, शांखायन और मंडूकायन हैं।
ऋग्वेद की सबसे पुरानी प्रतिलिपि भोजपत्र पर
ऋग्वेद की सबसे पुरानी प्रति भोजपत्र पर लिखी हुई है। इसे पुणे के भंडारकर ओरिएंटल रिसर्च इंस्टीट्यूट (BORI) में रखा गया है। इनमें से एक पांडुलिपि शारदा स्क्रिप्ट में लिखी हुई है, जबकि बाकी 29 मेनुस्क्रिप्ट देवनागरी में हैं। ये कॉपी 500 साल से भी पुरानी है, जिसे जर्मन प्रोफेसर जोहान जॉन बुहलर ने सहेजकर रखा था।
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