
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में विकास के लिए खास ध्यान दिया है। इसका असर जमीन पर दिख रहा है। SBI के रिसर्च में पता चला है कि ग्रामीण भारत की गरीबी काफी हद तक कम हुई है।
SBI के उपभोग व्यय सर्वे से पता चला है कि 2024 में ग्रामीण गरीबी गिरकर 4.86% रह गई। 2023 में यह 7.2% थी। 2012 ग्रामीण गरीबी 25.7% थी। शहरी गरीबी में भी कमी आई है। 2024 में शहरी गरीबी 4.09% है। 2023 में यह 4.6% और 2011-12 में 13.7% थी। समग्र गरीबी का स्तर अब 4-4.5% है।
SBI की रिपोर्ट के अनुसार 2021 की जनगणना पूरी होने और ग्रामीण शहरी आबादी का नया हिस्सा प्रकाशित होने के बाद इन संख्याओं में मामूली संशोधन हो सकता है। शहरी गरीबी में और भी कमी आ सकती है। भारत में गरीबी दर 4%-4.5% के बीच हो सकती है। इसमें अत्यधिक गरीबी लगभग न्यूनतम होगा।
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SBI के रिपोर्ट के अनुसार ग्रामीण और शहरी क्षेत्र में आमदनी का अंतर कम हुआ है। गांव के लोगों की आमदनी बढ़ी है। इससे गरीबी कम करने में मदद मिली है। ग्रामीण और शहरी लोगों द्वारा हर महीने उपभोग पर किए जाने वाले खर्च के बीच अंतर 69.7% है। यह 2009-10 में 88.2% था। सरकार द्वारा लाभार्थियों के खाते में पैसे भेजने, ग्रामीण बुनियादी ढांचे के निर्माण, किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण आजीविका में सुधार जैसे पहल के चलते यह बदलाव आया है।
SBI ने बताया है कि खाने के सामान की कीमत बढ़ने का असर उच्च आय वाले राज्यों की तुलना में निम्न आय वाले राज्यों में अधिक पड़ता है। इससे उपभोग के सामान की मांग घट जाती है। इससे यह पता चलता है कि उच्च आय वाले राज्यों की तुलना में निम्न आय वाले राज्यों के ग्रामीण लोग अधिक जोखिम लेने से बचते हैं।
SBI ने अनुमान लगाया है कि नवंबर 2024 में मुद्रास्फीति 5.5% के मुकाबले 5.0% होगी। भारत के अधिकांश उच्च आय वाले राज्यों में बचत दर राष्ट्रीय औसत (31%) से अधिक है। उत्तर प्रदेश और बिहार में बचत दर कम है।
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