
नई दिल्ली: रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि इस समय त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई (पीसीए) की पाबंदियों में चल रहे सार्वजनिक क्षेत्र के चारों बैंक हालात सुधारने के प्रयास में लगे हैं और उनकी निगरानी की जा रही है।
इन बैंकों में इंडियन ओवसरसीज बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, यूको बैंक और यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया शामिल हैं। इनकी वित्तीय कमजोरी की वजह से इन पर कर्ज की मंजूरी , वरिष्ठ प्रबंधकों तथा निदेशकों के वेतन तथा पारितोषिकों के भुगतान समेत कई तरह की पाबंदियां लगी हैं।
बैंक अपना काम सुधारें
दास ने पीटीआई भाषा से एक साक्षात्कार में कहा, ‘‘हम चाहेंगे कि ये बैंक अपना काम सुधारें और यथा शीघ्र पीसीए के दायरे से बाहर निकलें। हम इन बैंकों के साथ संपर्क में हैं। हम इनकी निगरानी कर रहे हैं। वे प्रयास कर रहे हैं। बैंकों को पीसीए दायरे से बाहर आने के लिये कई कदम उठाने होते हैं, और इनकी निगरानी की जा रही है।’’
सरकार ने हाल ही में इन चार बैंकों में 11,521 करोड़ रुपये लगाने की घोषणा की है। इसमें इंडियन ओवरसीज बैंक को 4,360 करोड़ रुपये, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया को 3,353 करोड़ रुपये, यूको बैंक को 2,142 करोड़ रुपये और यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया को 1,666 करोड़ रुपये मिले हैं।
रिजर्व बैंक ने पिछले साल पांच बैंकों बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स, इलाहाबाद बैंक और कॉरपोरेशन बैंक को दो चरणों में पीसीए दायरे से बाहर किया था।
(यह खबर समाचार एजेंसी भाषा की है, एशियानेट हिंदी टीम ने सिर्फ हेडलाइन में बदलाव किया है।)
(फाइल फोटो)
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