Stock Market Crash Today: 3 बजते-बजते स्वाहा हुए ₹9 लाख करोड़, जानें शेयर बाजार टूटने की 4 बड़ी वजहें

Published : Oct 01, 2026, 02:48 PM IST
Share Market Crash

सार

Why Share Market is Falling: शेयर बाजार में गुरुवार को जोरदार गिरावट देखने को मिली। कुछ ही घंटे में निवेशकों के करीब 9 लाख करोड़ डूब गए। जानिए बाजार क्रैश की वजहें।

Share Market Crash Reasons: शेयर बाजार में आज 1 अक्टूबर का दिन निवेशकों के लिए किसी बुरे सपने जैसा साबित हुआ। गुरुवार को जैसे-जैसे घड़ी की सुइयां आगे बढ़ीं, दलाल स्ट्रीट पर बिकवाली का तूफान तेज होता गया। दोपहर 3 बजते-बजते सेंसेक्स 1,000 अंक से ज्यादा टूट गया, वहीं निफ्टी भी फिसलकर 22,300 के अहम स्तर से नीचे चला गया। इस जोरदार गिरावट का असर यह हुआ कि सुबह बाजार खुलते ही जहां BSE पर लिस्टेड कंपनियों की कुल मार्केट वेल्थ करीब 471.86 लाख करोड़ रुपए थी, वो दोपहर 1:45 बजे तक घटकर 462.71 लाख करोड़ रुपए रह गई। यानी महज कुछ ही घंटों के भीतर निवेशकों के करीब 9 लाख करोड़ रुपए स्वाहा हो गए। हर तरफ हाहाकार मचा हुआ है और आम निवेशक परेशान हैं कि अचानक ऐसा क्या हो गया? आइए जानते हैं वो 4 बड़े कारण, जिनकी वजह से बाजार बुरी तरह लड़खड़ाया...

अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में जोरदार उछाल

विदेशी निवेशकों के लिए अमेरिकी बॉन्ड हमेशा सबसे सुरक्षित निवेश माने जाते हैं। अमेरिका में 10 साल की सरकारी बॉन्ड यील्ड बढ़कर 5.3% के पार पहुंच गई है। जब अमेरिका में बिना किसी रिस्क के इतना बढ़िया रिटर्न मिलने लगता है, तो दुनिया भर के बड़े निवेशक भारत जैसे विकासशील और रिस्की शेयर बाजारों से अपना पैसा निकालकर अमेरिकी बॉन्ड में लगाना शुरू कर देते हैं।

FIIs की ताबड़तोड़ बिकवाली

भारतीय बाजार से विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) लगातार पैसा खींच रहे हैं। अकेले 30 सितंबर को इन्होंने 10,000 करोड़ रुपए से ज्यादा के शेयर बेचे थे। अगर बीते दो कारोबारी सत्रों की बात करें, तो विदेशी निवेशक 20,000 करोड़ रुपए से ज्यादा की बिकवाली कर चुके हैं। जब इतने बड़े पैमाने पर शेयर बेचे जाते हैं, तो बाजार का संभलना बेहद मुश्किल हो जाता है।

डॉलर के मुकाबले कमजोर पड़ता रुपया

भारतीय मुद्रा पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। गुरुवार को डॉलर के मुकाबले रुपया टूटकर 96 के पार चला गया। जब रुपया कमजोर होता है, तो विदेशी निवेशकों को डॉलर के हिसाब से मिलने वाला मुनाफा घट जाता है। इससे वे अपने पैसे को बचाने के लिए भारत से तेजी से निकासी करने लगते हैं।

कच्चे तेल की कीमतों में अनिश्चितता और ईरान तनाव

ईरान के साथ बढ़ते तनाव और सप्लाई में रुकावट की आशंकाओं ने कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों को लेकर चिंता बढ़ा दी है। भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल दूसरे देशों से खरीदता है। ऐसे में अगर तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो भारत का आयात बिल बढ़ेगा और महंगाई का खतरा गहराएगा, जिसका असर बाजार के सेंटीमेंट पर दिखता है। इसके साथ ही बाजार में डर का पैमाना (India VIX) भी तेजी से ऊपर चढ़ गया है।

डिस्क्लेमर: ये आर्टिकल सिर्फ सामान्य जानकारी और जागरूकता के उद्देश्य से है। इसे किसी भी तरह के निवेश या शेयर को खरीदने-बेचने की सलाह न माना जाए। शेयर बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश से पहले अपने सेबी सर्टिफाइड वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें।

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