
नई दिल्लीः कार खरीदनेवालों अब माइलेज, फीचर से ज्यादा सेफ्टी फीचर (Safety Features in Car) पर ध्यान दे रहे हैं। इसी कारण कंपनियां भी इसको लेकर सजग हो गई हैं। बदलते वक्त के साथ सेफ्टी महत्वपूर्ण मुद्दा हो गया है। कार कंपनियां अपने कस्टमर्स की सेफ्टी का ख्याल रखने के लिए कार क्रैश टेस्ट (Crash Test) कराती है। इसके मुताबिक कौन सी कार कितनी सेफ है इसका पता चलता है। ताकि कस्टमर अपने जरूरत के मुताबिक वैसी ही कार चुनें जैसी उन्हें सेफ्टी चाहिए।
जब बात सेफ्टी की हो रही है तो चलिए आपको एक आंकड़े से रूबरू कराते हैं। यह आंकड़ा नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) का है। इसके मुताबिक देश में औसतन हर साल एक लाख से ज्यादा लोग रोड एक्सीडेंट में मरते हैं। हालांकि जैसे जैसे कारों के सेफ्टी फीचर बेहतर हो रहे हैं रोड एक्सीडेंट में मरने वाली लोगों की संख्या घट रही है। ऐसे में जरूरी है कि आप जब भी कार का चुनाव करें तो क्रैश रेटिंग जरूर देख लें।
कार सेफ्टी ज्यादा जरूरी
अब कार खरीदने वाले ज्यादातर लोग कार की क्रैश टेस्टिंग के बारे में जानने लगे हैं। किसी भी कार की मजबूती या सेफ्टी का अंदाजा अब क्रैश टेस्ट और सेफ्टी रेटिंग से लगाया जाता है। ग्लोबल न्यू कार असेसमेंट प्रोग्राम (NCAP) द्वारा कारों का क्रैश टेस्ट कर सेक्टी रेटिंग दी जाती है। इसी टेस्ट में उनकी सेफ्टी का पता चलता है. ये सेफ्टी बड़े और बच्चों दोनों के लिए अलग-अलग होती है।
क्रैश टेस्ट क्या है
NCAP यानी ग्लोबल न्यू कार असेसमेंट प्रोग्राम द्वारा लगभग सभी कंपनियों की कारों का क्रैश टेस्ट किया जाता है। सभी कंपनियां अपनी कार के हर मॉडल और वैरिएंट पर अलग-अलग सेफ्टी फीचर्स देती है। इनमें से एयरबैग्स, ABS, EBD, कैमरा, स्पीड अलर्ट, सेफ्टी बेल्ट, बैक सेंसर जैसे फीचर्स शामिल रहते हैं। जब कार का क्रैश टेस्ट होता है, तब यही सेफ्टी फीचर्स होते हैं जो तय करते हैं कि कार जब क्रैश हुआ तो अंदर बैठे लोगों का कितना नुकसान हुआ।
कैसे मिलता है सेफ्टी रेटिंग
अब आपको बताते हैं कि सेफ्टी रेटिंग कैसे मिलता है। सेफ्टी रेटिंग क्रैश टेस्ट से मिलता है। इसके लिए जिस कार का टेस्ट होना है, उस कार में इंसान जैसी डमी को बिठा दिया जाता है। टेस्ट के दौरान गाड़ी को फिक्स स्पीड से किसी हार्ड ऑब्जेक्ट के साथ टकराया जाता है। इस दौरान कार में 4 से 5 डमी होते हैं। बैक सीट पर बच्चे की डमी भी रखी जाती है। ये चाइल्ड सेफ्टी के मानक का पता लगाता है।
सेफ्टी रेटिंग से सुरक्षित कार खरीदने में मदद
कैश टेस्ट में देखा जाता है कि कार जब क्रैश कर रही थी तब एयरबैग खुला था या नहीं। इंसानों की जो डमी रखी गई थी, वह कितना डैमेज हुई। कार के दूसरे सेफ्टी फीचर्स पर भी ख्याल रखा जाता है। इन सभी के आधार पर रेटिंग दी जाती है। इसी आधार पर ग्राहकों को सेप कार खरीदने में मदद मिलती है। इसमें एक समस्या और आती है। NCAP किसी भी कार के सभी वैरिएंट का क्रैश टेस्ट नहीं करता है।
क्रैश टेस्ट में होती हैं कई गड़बड़ियां
एक रिपोर्ट के मुताबिक NCAP द्वारा करवाये जा रहे क्रैश टेस्ट में कई गड़बड़ियां होती हैं। क्योंकि ग्लोबल NCAP अपने खर्च पर किसी भी कार का बेस मॉडल खुद के रुपए से खरीदती है और उसका टेस्ट करती है। उसके बाद कॉपीराइट को कार कंपनी को बेच देती है। इससे यह पता नहीं चल पाता है कि टॉप मॉडल की सेफ्टी कैसी है।
कार लेते समय इन बातों का रखें ध्यान
क्रैश रेटिंग आपके जीवन के लिए कितना जरूरी है यह आप समझ गए होंगे। अब आपको बताते हैं कि सबसे पहले आप डिजाइन, मॉडल, लुक वगैरह पर ना जाएं। पहले आप सेफ्टी फीचर देखें। सबसे पहले कार की क्रैश टेस्ट रेटिंग देखें। कोशिश करें कि 4 स्टार या 5 स्टार क्रैश रेटिंग वाली कार को ही खरीदें। कार में कौन-कौन से लाइफ सेविंग फीचर्स दिए गए हैं यह भी जांचें। उसमें अच्छी क्वालिटी का एयर बैग और सीट बेल्ट होना चाहिए। पीछे की सीट पर भी सीट बेल्ट और छोटे बच्चों के लिए बेबी सीट बेल्ट है या नहीं, इसकी भी जांच करें। उसके बाद लुक वगैरह पर जाएं।
भारत में जल्द शुरू होगा क्रैश टेस्ट
ग्लोबल न्यू कार असेसमेंट प्रोग्राम (GNCAP) जल्द ही भारत में कारों की क्रैश टेस्टिंग शुरू करेगी। इसको लेकर 24 जून को सड़क, परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने एक ट्वीट कर कहा कि इंडिया में Bharat NCAP को एप्रुवल दे दिया गया है। गौरतलब है कि वर्तमान में कारों को जर्मनी के म्यूनिख में स्थित ADAC के तकनीकी केंद्र में क्रैश टेस्ट कराया जाता है। ब्रिटेन में भी इसका केंद्र है।
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