
बिजनेस डेस्कः देश में मोटर व्हीकल एक्ट का सख्ती से पालन किया जा रहा है। नया मोटर व्हीकल एक्ट लागू होने के बाद ट्रैफिक नियम ना मानने पर लोगों को भारी जुर्माना देना पड़ रहा है। लेकिन सवाल यह उठता है कि आपका दिया हुआ चालान कहां जाता है। क्या उसे पुलिस वाले रख लेते हैं? क्या उसे पुलिस विभाग या ट्रैफिक विभाग रख लेता है। नहीं, ऐसा कतई नहीं है। लोग अक्सर यही समझते हैं। जबकि सच्चाई कुछ और ही है। चलिए बताते हैं कि देश के अलग-अलग राज्यों में जो चालान काटे जा रहे हैं, उसकी राशि किसके खाते में जा रही है।
किसके खाते में जाती है चालान की राशि?
अगर किसी राज्य की ट्रैफिक पुलिस किसी का चालान काटती है तो जो रकम चालान से प्राप्त हुई है वो राशि राज्य सरकार के खाते में जमा होती है। उदाहरण के लिए अगर आपके वाहन का चालान पटना में कटा है तो उससे जो राशि मिलेगी वो बिहार सरकार के परिवहन मंत्रालय के खाते में जमा की जाएगी। वहीं यदि चालान केंद्र शासित प्रदेश में कटा है तो चालान की राशि केंद्र सरकार के खाते में जाएगी। राजधानी दिल्ली के मामले में चालान को लेकर नियम में मामूली बदलाव है। असल में दिल्ली की ट्रैफिक पुलिस केंद्र सरकार के अधीन है जबकि स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी दिल्ली सरकार के लिए जिम्मेदार होती है। ट्रैफिक पुलिस और स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी, दोनों को ही दिल्ली में चालान काटने का अधिकार प्राप्त है।
चालान कोर्ट में जमा कराने पर क्या होता है?
कई बार काटी गई चालान की राशि को कोर्ट में जमा करवाया जाता है, ऐसी स्थिति में चालान की राशि राज्य सरकार को जाती है। हालांकि दिल्ली समेत अन्य केंद्र शासित राज्यों में यह पैमाना बदल जाता है। उदाहरण के लिए अगर दिल्ली में ट्रैफिक पुलिस चालान काटती है तो वह राशि केंद्र सरकार के खाते में जाएगी। इसी तरह अगर स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी ने चालान काटा है तो यह राशि दिल्ली सरकार के खाते में जाएगी क्योंकि राज्य का परिवहन विभाग दिल्ली सरकार के अधीन आता है।
चालान नेशनल हाईवे पर काटा जाए तो क्या होगा?
यदि चालान नेशनल हाईवे में काटता है तो चलानी राशि केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बंट जाती है और यदि चालान स्टेट हाईवे पर कटा है तो चालानी राशि राज्य सरकार के खाते में जाती है। लेकिन दिल्ली में यह देखा जाता है कि चालान काटने वाली ट्रैफिक पुलिस है या स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी।
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