
Highest Paid Indian CEOs in America: जब भी दुनिया के सबसे अमीर लोगों या सबसे ज्यादा कमाई करने वाले CEOs की बात होती है, तो हमारे दिमाग में एलन मस्क (Elon Musk) या जेफ बेजोस जैसे नाम आते हैं, लेकिन अमेरिका के बिजनेस बाजार से एक ऐसी खबर आई है जिसने हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया है। अमेरिका में सबसे ज्यादा सैलरी पाने वाले CEOs की एक नई लिस्ट आई है। इस लिस्ट में दुनिया के सबसे अमीर इंसान एलन मस्क के ठीक बाद दूसरे नंबर पर एक भारतीय मूल के लीडर ने कब्जा कर लिया है। इनका नाम है शंख मित्रा (Shankh Mitra)। इन्हें करीब $821 मिलियन यानी लगभग ₹7,061 करोड़ का भारी-भरकम पैकेज मिला है। यही नहीं, इस लिस्ट के टॉप 10 में एक और भारतीय धुरंधर शामिल हैं, साइबर सिक्योरिटी कंपनी 'पालो ऑल्टो नेटवर्क्स' के बॉस निकेश अरोड़ा, जो ₹840 करोड़ ($100 मिलियन) के पैकेज के साथ 8वें नंबर पर हैं। आइए जानते हैं कि जादवपुर यूनिवर्सिटी से पढ़े शंख मित्रा ने यह मुकाम कैसे हासिल किया...
शंख मित्रा की शुरुआती पढ़ाई-लिखाई भारत में ही हुई। उन्होंने कोलकाता की मशहूर जादवपुर यूनिवर्सिटी से इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग की डिग्री ली। इसके बाद वे आगे की पढ़ाई के लिए अमेरिका चले गए और वहां की कोलंबिया बिजनेस स्कूल से MBA पूरा किया। Welltower कंपनी में आने से पहले उन्होंने PwC (प्राइसवाटरहाउसकूपर्स), फिडेलिटी और सिटाडेल जैसी बड़ी ग्लोबल कंपनियों में इन्वेस्टमेंट और पोर्टफोलियो मैनेजमेंट का काम संभाला। साल 2016 में वे Welltower कंपनी से जुड़े और अपने शानदार काम के दम पर अक्टूबर 2020 में कंपनी के CEO बन गए।
यह अमेरिका की एक बहुत बड़ी रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट कंपनी (REIT) है, जो बुजुर्गों के रहने के लिए हाईटेक घर (Senior Housing) और हेल्थकेयर से जुड़ी प्रॉपर्टीज बनाने और उनमें निवेश करने का काम करती है। शंख मित्रा की अगुवाई में पिछले एक साल में इस कंपनी ने अपने निवेशकों को 50% का बंपर रिटर्न दिया है।
इतनी बड़ी रकम सुनकर कोई भी सोच में पड़ सकता है कि क्या सच में किसी को एक साल में ₹7,000 करोड़ से ज्यादा की सैलरी मिल सकती है? दरअसल, अमेरिकी कंपनियों में बड़े अधिकारियों को यह पैसा सीधे कैश या बैंक अकाउंट में नहीं दिया जाता। शंख मित्रा के इस पूरे पैकेज का 99% हिस्सा कंपनी के शेयर्स (Stock Grants और RSUs) के रूप में है। उन्हें सीधे कैश सैलरी नहीं मिली है। ऐसा नहीं है कि वे इन शेयर्स को आज ही बेचकर पैसा निकाल सकते हैं। समझौते के मुताबिक, इस रकम का आधा हिस्सा उन्हें साल 2031 में मिलेगा (बशर्ते वे तब तक कंपनी में बने रहें)। बाकी आधा हिस्सा इस बात पर निर्भर करता है कि अगले 5 सालों में कंपनी की मार्केट वैल्यू कम से कम 45% बढ़े और वह बाकी शेयर मार्केट इंडेक्स को पछाड़ दे। मतलब जब कंपनी का स्टॉक बहुत अच्छा परफॉर्म करता है, तो इन शेयर्स की वैल्यू बढ़ जाती है और कागजों पर यह पैकेज इतना बड़ा दिखने लगता है। यह पूरी तरह से कंपनी के मुनाफे और मार्केट के उतार-चढ़ाव से जुड़ा होता है।
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