
Office Tips: ऑफिस में मेहनत करना जरूरी है, लेकिन सिर्फ ज्यादा काम करना ही तरक्की की गारंटी नहीं है। भारतीय रिक्रूटर जूही भाटिया ने इंस्टाग्राम पर ऐसे 9 ‘slightly shady’ corporate moves शेयर किए हैं, जो प्रोफेशनल्स को स्मार्ट तरीके से करियर आगे बढ़ाने में मदद कर सकते हैं। उनकी सलाह का फोकस लोगों को खुश करने के बजाय वर्कप्लेस विजिबिलिटी, सेल्फ-एडवोकेसी, बॉउंड्रीज और नेगोशिएशन पर है।
अगर आपने अपना टास्क तय समय से पहले पूरा कर लिया है, तो हर बार अपनी खाली क्षमता का ऐलान करना जरूरी नहीं। जूही भाटिया का कहना है कि सबसे तेज कर्मचारी बनने की कोशिश में लोग अनजाने में अपने ऊपर और काम ले लेते हैं।
टीमवर्क जरूरी है, लेकिन अपने व्यक्तिगत योगदान को छिपाना भी समझदारी नहीं। जिस प्रोजेक्ट को आपने लीड किया है या जिसे आपने तैयार किया है, उसके बारे में साफ तौर पर बताना चाहिए। हर उपलब्धि को सिर्फ ‘हमने’ कहकर पेश करने से आपकी व्यक्तिगत भूमिका नजरअंदाज हो सकती है।
अच्छा काम करने के साथ यह भी मायने रखता है कि संगठन में आपके काम को कौन पहचान रहा है। मीटिंग में अपनी बात रखें, सही सवाल पूछें और ऐसे प्रोजेक्ट्स का हिस्सा बनने की कोशिश करें जिन पर सीनियर लीडर्स की नजर हो।
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जूही भाटिया की सलाह है कि नौकरी बदलने का इरादा न हो, तब भी इंटरव्यू देना गलत नहीं है। इससे आपको पता चल सकता है कि दूसरे रिक्रूट्स आपकी स्किल्स के लिए कितनी सैलरी या बेहतर रोल देने को तैयार हैं।
ऑफिस पार्टी की प्लानिंग, मीटिंग नोट्स या दूसरे गैर-जरूरी अतिरिक्त कामों की जिम्मेदारी बार-बार उठाने से आपका मुख्य काम प्रभावित हो सकता है। इसलिए हर जिम्मेदारी के लिए तुरंत ‘हां’ कहने के बजाय अपनी प्राथमिकताएं तय करें।
किसी पद के लिए खुद को 100 फीसदी तैयार महसूस करना जरूरी नहीं। अगर आपको लगता है कि आप अगली जिम्मेदारी संभाल सकते हैं, तो प्रमोशन या बेहतर सैलरी की मांग सामने रखना चाहिए।
ऑफिस पॉलिटिक्स से बचना मुश्किल हो सकता है, लेकिन जूही भाटिया का सुझाव है कि अपने मैनेजर की जरूरतों को समझें। जरूरी जानकारी पहले उपलब्ध कराना और समस्या के साथ संभावित समाधान रखना आपकी प्रोफेशनल वैल्यू बढ़ा सकता है।
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अगर किसी एक कर्मचारी के पास ही किसी काम की पूरी जानकारी है, तो संगठन उसी पर निर्भर हो जाता है। इसलिए अपने काम को दूसरे सहयोगियों को सिखाना आपके लिए रिस्क नहीं, बल्कि आगे बढ़ने का रास्ता बन सकता है। इससे आप सिर्फ काम करने वाले नहीं, बल्कि जिम्मेदारी संभालने वाले प्रोफेशनल के तौर पर नजर आते हैं।
भाटिया की आखिरी सलाह सैलरी नेगोशिएशन से जुड़ी है। अपनी अपेक्षा स्पष्ट करने के बाद तुरंत बातचीत भरने की कोशिश न करें। सामने वाला क्या ऑफर करता है, उसे सुनने के लिए कुछ सेकंड की खामोशी भी फायदेमंद हो सकती है।
जूही भाटिया की इन 9 सलाहों को ‘शेडी’ इसलिए कहा गया है क्योंकि इनमें ट्रेडिशनल ऑफिस एटिकेट्स से थोड़ा अलग सोचने की बात है। हालांकि इनके पीछे का बड़ा संदेश यही है कि करियर ग्रोथ के लिए सिर्फ मेहनत नहीं, बल्कि अपने काम की पहचान, सही सीमाएं, नेटवर्किंग, आत्मविश्वास और बेहतर नेगोशिएशन स्किल्स भी जरूरी हैं।
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