
आईपीएस आदित्य कुमार ने मंगलवार को पटना अदालत के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। 2011 बैच के आईपीएस ऑफिसर एक साल से अधिक समय से फरार चल रहे थे। IPS आदित्य कुमार ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा उनकी गिरफ्तारी की पूर्व जमानत याचिका खारिज होने के बाद आत्मसमर्पण कर दिया है। बता दें कि गया के पूर्व एसएसपी आदित्य कुमार ने मंगलवार को पटना के विशेष न्यायिक दंडाधिकारी सारिका बहालिया की आदालत में जमानत की अर्जी दी थी जिसे खारिज कर दिया गया। भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) ऑफिसर आदित्य कुमार पर अपने खिलाफ आधिकारिक कार्यवाही को प्रभावित करने के लिए पटना उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश की नकली व्हाट्सएप प्रोफाइल बनाने का आरोप है।
IPS आदित्य कुमार कौन है?
आदित्य कुमार वर्ष 2011 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। वे मूल रूप से यूपी के मेरठ के निवासी हैं। अवैध शराब से जुड़े एक मामले में गया के तत्कॉलीन एसएसपी आदित्य कुमार पर वहां के फतेहपुर थाने में प्राथमिकी की गई थी। जिसके बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया था।
फर्जी व्हाट्सएप अकाउंट बना कर केस खत्म करवाने का दबाव
अधीक्षक रैंक के पुलिस ऑफिसर आदित्य कुमार ने कथित तौर पर एक फर्जी व्हाट्सएप अकाउंट के माध्यम से बिहार के तत्कालीन डीजीपी एसके सिंघल को धोखा दिया था, जिसमें प्रोफाइल पिक्चर के रूप में पूर्व मुख्य न्यायाधीश संजय करोल की फोटो थी। आरोप है कि इसी फर्जी प्रोफाइल वाले व्हाट्सएप नंबर से उनके एक दोस्त अभिषेक भोपालिका ने बिहार के टॉप पुलिस ऑफिसर से संपर्क किया और शराब माफियाओं के साथ कथित संलिप्तता के संबंध में आदित्य कुमार के खिलाफ मामला वापस लेने और केस खत्म करवाने के लिए कहा।
सुप्रीम कोर्ट में जमानत याचिका खारिज
निचली अदालतों से जमानत याचिका खारिज होने के बाद कुमार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था, लेकिन शीर्ष अदालत ने भी याचिका खारिज कर दी और आईपीएस ऑफिसर को आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया। न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह, न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की खंडपीठ ने कहा कि आईपीएस ऑफिसर और दो अन्य न्यायिक अधिकारियों से जुड़े बड़े मुद्दे को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है, जिससे कुमार को दो सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया गया।
बेऊर जेल भेजा गया
आदित्य कुमार के कोर्ट में सरेंडर करने के बाद उन्हें पूरी सुरक्षा के साथ बेऊर जेल भेज दिया गया है। यहां उन्हें स्पेशल वार्ड में रखा गया है। बता दें कि व्हाट्सएप से बार-बार फर्जी चीफ जस्टिस बना कर डीजीपी को कॉल कराने और बातचीत के बाद शक होने पर मामले की जांच की गई जिसके बाद पूरा मामला सामने आया।
पूरी केस डायरी सीलबंद कवर में जमा करने का आदेश
शीर्ष अदालत ने बिहार पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा को सुनवाई की अगली तारीख 12 दिसंबर को आपराधिक मामले की पूरी केस डायरी सीलबंद कवर में जमा करने का आदेश दिया है।
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