
करियर डेस्क : जापान (Japan) के पूर्व पीएम शिंजो आबे की 67 साल की उम्र में हत्या कर दी गई है। शुक्रवार सुबह उन्हें दो गोलियां मारी गई। उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया लेकिन बचाया नहीं जा सका। आबे के इस तरह दुनिया से चले जाने पर सभी स्तब्ध हैं। हर कोई उनकी पर्सनॉलिटी को पसंद करता था। उनके निधन पर जापान में शोक फैल गया है। खुद प्रधानमंत्री फुमिओ किशिदा इमोशनल हो गए। शिंजो आबे भले ही अब दुनिया में नहीं है लेकिन उन्होंने जापान के लिए जो कुछ किया, उसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। आबे की पॉलिटिकल जर्नी काफी शानदार रहा और करियर भी। जानिए कितने पढ़े लिखे थे शिंजो आबे, पीएम बनने के पहले क्या करते थे काम...
पॉलिटिकल साइंस में ग्रेजुएट थे शिंजो आबे
शिंजो आबे का जन्म 21 सितंबर 1954 को टोक्यो में हुआ था। वह काफी ताकतवर और प्रभावशाली फैमिली से आते थे। उनकी शुरुआती पढ़ाई ओसाका के साइकेई एलीमेंट्री स्कूल में ही हुई थी। इसके बाद शिंजो आबे ने साल 1977 में साइकेई यूनिवर्सिटी से पॉलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन किया। इसके बाद आगे की पढ़ाई के लिए वे संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) चले गए। दक्षिण कैलिफोर्निया में यूएससी सोल प्राइस स्कूल ऑफ पब्लिक पॉलिसी में सार्वजनिक नीति की पढ़ाई करने लगे। हालांकि, वहां सिर्फ तीन सेमेस्टर की पढ़ाई के बाद वे साल 1979 में जापान लौट आए।
स्टील प्लांट में नौकरी की
अमेरिका से वापस आने के बाद शिंजो आबे अप्रैल 1979 में कोबे स्टील प्लांट में जॉब शुरू कर दी। यहां उन्होंने दो साल तक नौकरी की और फिर साल 1982 में नौकरी छोड़ दी। नौकरी के दौरान ही वे लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी के सदस्य बने और पार्टी की जनरल काउंसिल के अध्यक्ष के निजी सचिव बन गए। इसके बाद उन्होंने महासचिव के सचिव का भी पदभार संभाला। इसी के बाद उन्होंने जापान की राजनीति में एंट्री ली। एक राजनेता बनने से पहले शिंजो सरकार से जुड़े कई पदों पर रहे और कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। वह विदेश मामलों के मंत्री के सहायक कार्यकारी रहे।
जापान के सबसे कम उम्र के प्रधानमंत्री
शिंजो आबे सेकेंड वर्ल्ड वार के बाद सबसे कम उम्र के पीएम बने। वे साल 2006 में लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी की तरफ से प्रधानमंत्री चुने गए, 2007 तक देश के पीएम रहे। जिस समय वो पीएम बने, सिर्फ 52 साल के थे। आबे पहले ऐसे पीएम थे जिनका जन्म विश्व युद्व के बाद हुआ। वे जापान के सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहे।
शिक्षा को लेकर ऐसी थी सोच
शिंजो आबे शिक्षा में राष्ट्रवादी विचारों को बढ़ावा देना चाहते थे। उन्होंने कई बार ऐसे प्रयास भी किए जिससे राष्ट्रवाद को बढ़ावा मिल सके। मार्च 2007 की बात है, जब शिंजो ने एक विधेयक पेश किया, जिसका उद्देश्य बच्चों में राष्ट्रवाद और देश प्रेम को बढ़ावा देना था।
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