पटना (Bihar) । बिहार विधानसभा की 248 सीटों पर इस बार चुनाव हो रहा है। इस बार 3722 प्रत्याशी चुनावी मैदान में हैं। जिनके बारे में हर कोई जानना चाहता है, क्योंकि इलेक्शन के दौरान हमेशा धनबल और बाहुबल की बातें होती रही हैं, जैसा की इस बार भी देखने को मिल रहा है। ऐसे में आज हम आपको इनके बता रहे हैं। इस बार तीन चरण में हो रहे विधानसभा चुनाव में 1201 प्रत्याशी दागी हैं, जिनपर आपराधिक मामले दर्ज हैं। इतना ही नहीं 1231 करोड़पति भी माननीय बनने का सपना संयोए चुनावी मैदान में हैं। बता दें कि प्रत्याशियों को नामांकन के दौरान अपने खिलाफ दर्ज मामलों का सार्वजनिक इश्तेहार देना पड़ता है। वहीं अगर 15 साल के आंकड़ों को देखें तो हर बार चुनाव में आपराधिक छवि वाले उम्मीदवारों और करोड़पति उम्मीदवारों की संख्या में वृद्धि हुई है। जी हां बीते 15 साल से खड़े उम्मीदवारों को देखें तो दागी प्रत्याशियों की संख्या 126% जबकि करोड़पति उम्मीदवारों की संख्या 2022% बढ़ी है। आइये जानते हैं 15 साल से लेकर अब तक का रिकार्ड।
पिछले 15 साल में 84 प्रतिशत प्रत्याशियों की संख्या बढ़ी है। आंकड़ों पर नजर करें तो साल 2005 में 2027 प्रत्याशी चुनावी मैदान में थे, जबकि साल 2010 के चुनाव में 3292 और पिछले इलेक्शन में 3401 उम्मीदवार थे, जबकि इस बार 3722 प्रत्याशी विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं।
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अब बात करें दागी प्रत्याशियों की तो 15 साल में 126 प्रतिशत इनकी संख्या बढ़ गई है। आंकड़ों के मुताबिक साल 2005 में आपराधिक मामले के प्रत्याशियों की संख्या 533 थी, जबकि साल 2010 इनकी संख्या 1048 हो गई। फिर पिछले चुनाव में घटकर 1016 हो गई थी। लेकिन, इस बार ये संख्या बढ़कर 1201 हो गई है।
(दूसरे चरण के मतदान के दौरान की फोटो)
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इसी तरह गंभीर मामले के प्रत्याशियों के बारे में बात करें तो साल 2005 में 345 उम्मीदवार थे। वहीं, साल 2010 में 614 हुई फिर, पिछले चुनाव में इनकी संख्या 779 हो गई और इस बार के चुनाव में और बढ़कर 915 हो गई है। बताते चले कि ये ऐसे प्रत्याशी हैं, जिनके आरोप सिद्ध होने पर पांच साल तक की सजा का प्रावधान है।
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अब बात करते हैं करोड़पति प्रत्याशियों की, जिनकी संख्या पिछले 15 साल में 2020 प्रतिशत बढ़ गई है। जी हां, साल 2005 में 58 करोड़पतियों ने ही विधानसभा चुनाव लड़ा था, जबकि साल 2010 में इनकी संख्या 274 हो गई। फिर पिछले चुनाव में 832 लड़े थे, जबकि इस बार 1231 करोड़पति चुनावी मैदान में है।
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स्नातक या उससे ऊपर के डिग्री धारक प्रत्याशियों की बात करें तो साल 2005 में 826 ही थी, जो साल 2010 में बढ़कर 1375 हुई। फिर पिछले चुनाव में 1408 हुई और इस बार बढ़कर 1794 हो गई है।
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महिला प्रत्याशियों की करें तो साल 2005 में 127 थी, जबकि साल 2010 में बढ़कर 214 हुई, फिर पिछले चुनाव में 271हो गई और इस बार सीधे 371 पहुंच गई है।
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