Published : Oct 16, 2020, 06:28 PM ISTUpdated : Oct 16, 2020, 06:48 PM IST
पटना (Bihar) । बिहार के किसान अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहे हैं। लेकिन, किसान नेता करोड़ों में खेल रहे हैं। यकीन नहीं तो पहले चरण में 28 अक्टूबर को होने वाले 71 विधानसभा सीट के लिए किए गए 40 नेताओं के एफिडेविट देखा जा सकता, जो खुद को किसान बताते हैं। मगर, उनकी संपत्ति करोड़ों की है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब नेशनल सैंपल सर्वे ऑफिस (एनएसएसओ) द्वारा वर्ष 2012-13 में किसानों की मासिक आय पर किए गए सर्वे में बताया गया कि बिहार के किसानों की आय मात्र 3558 रुपए हैं, तो फिर,ये किसान नेता करोड़पति कैसे?
पहले चरण में 1065 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इन प्रत्याशियों के शपथ पत्रों के अनुसार 42 प्रत्याशियों का पेशा किसानी है, वहीं 93 अन्य ऐसे प्रत्याशी भी हैं, जिन्होंने कृषि को अन्य व्यवसाय के साथ पेशा बताया है।
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प्रत्याशियों के ही एफिडेविट के आधार पर अगर टाप थ्री उम्मीदवारों की लिस्ट निकाले तो पहला नाम औरंगाबाद के भाजपा प्रत्याशी रामाधार सिंह का आता है, जिनके पास सबसे ज्यादा जमीन 29.39 एकड़ है। इतना ही नहीं उनकी कुल संपत्ति 4 करोड़ 89 लाख है।
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ज्यादा जमीन और करोड़पति किसान नेता की लिस्ट में दूसरे नंबर पर जमालपुर से कांग्रेस उम्मीदवार अजय सिंह हैं, जिनके पास 27.75 एकड़ जमीन है। इनकी कुल संपत्ति 6 करोड़ 75 लाख है।
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मोकामा से जेडीयू के प्रत्याशी राजीव लोचन नारायण सिंह इस मामले में तीसरे नंबर हैं, क्योंकि उनके पास 22.5 एकड़ जमीन है। लेकिन, अमीर नेता की बात करें तो यही हैं, क्योंकि इनके पास कुल संपत्ति करीब 9 करोड़ रुपए की है।
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शपथ पत्र की पड़ताल करने पर एक और हैरान करने वाली सच्चाई सामने आई है, वो यह कि 42 प्रत्याशियों में से दो प्रत्याशी ऐसे भी हैं, जो किसान तो हैं। लेकिन, इनके पास खेत नहीं है, जैसा की उनके एफिडेविट में लिखा गया है। इनमें चकाई से भारतीय लोकमत राष्ट्रवादी पार्टी के मो. तबरेज अंसारी और बाढ़ से रालोसपा के उम्मीदवार राकेश सिंह शामिल हैं।
(फोटो में नामांकन स्थल)
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