Investment : फिक्स्ड डिपॉजिट या RD, कहां पैसा लगाना हो सकता है फायदे का सौदा

Published : Mar 19, 2021, 08:11 AM IST

बिजनेस डेस्क। कम ब्याज दर मिलने के बावजूद बैंकों में फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) रिकरिंग डिपॉजिट (RD) एक तय रिटर्न और पैसे की सुरक्षा की वजह से परंपरागत निवेशकों के लिए बेहतर इन्वेस्टमेंट ऑप्शन बना हुआ है। बता दें कि कोविड-19 (Covid-19) महामारी की वजह से बाजार की स्थितियां बेहद अनिश्चित हो गई हैं। ऐसे में, कोई भी निवेशक रिस्क नहीं लेना चाहता है। इसके बावजूद बैंकों की एफडी और आरडी में निवेश का क्रेज पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है। आज भी ऐसे लोगों की कमी नहीं है, जो बैंकों की फिक्स्ड डिपॉजिट और रिकरिंग स्कीम में पैसा लगा रहे हैं। कई बैंक इन पर पहले की तुलना में कम, लेकिन ठीकठाक ब्याज दे रहे हैं। जानें फिक्स्ड डिपॉजिट और रिकरिंग डिपॉजिट में से किसमें निवेश करने पर ज्यादा रिटर्न हासिल हो सकता है। (फाइल फोटो)  

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Investment : फिक्स्ड डिपॉजिट या RD, कहां पैसा लगाना हो सकता है फायदे का सौदा
फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) एक ऐसी सेविंग स्कीम (Saving Scheme) है, जिसमें एक बैंक या फाइनेंशियल कंपनी में एक फिक्स्ड टेन्योर (Fixed Tenure) के लिए इन्वेस्ट किया जाता है। यह एक तरह से बैंक को दिया गया एक तरह का कर्ज होता है। इसके बदले में, सेविंग्स अकाउंट से ज्यादा रेट पर इंटरेस्ट मिलता है। इसकी अवधि पूरी हो जाने पर जमाकर्ता को इंटरेस्ट के साथ डिपॉजिट किया गया अमाउंट वापस मिल जाता है। (फाइल फोटो)
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यह एक निश्चित अवधि के लिए सेविंग करने और रिटायर्ड लोगों के लिए तय इंटरेस्ट हासिल करने का बेहतर तरीका है। इसमें क्यूमुलेटिव और नॉन-क्यूमुलेटिव, दो तरह के ऑप्शन होते हैं। क्यूमुलेटिव ऑप्शन में समय-समय पर मिलने वाला इंटरेस्ट अमाउंट भी इन्वेस्ट कर दिया जाता है, जिससे प्रिंसिपल अमाउंट के साथ-साथ इंटरेस्ट अमाउंट पर भी इंटरेस्ट मिलने लगता है। वहीं, नॉन-क्यूमुलेटिव ऑप्शन में जमाकर्ता को हर महीने, हर 3 महीने पर या हर साल इंटरेस्ट अमाउंट दे दिया जाता है। (फाइल फोटो)
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रिकरिंग डिपॉजिट (RD) फिक्स्ड डिपॉजिट की तरह एकमुश्त अमाउंट जमा नहीं करना पड़ता है। इसमें एक फिक्स्ड टेन्योर तक हर महीने एक तय अमाउंट इन्वेस्ट करना होता है। इससे सेविंग करने की आदत पड़ती है और बच्चों की पढ़ाई, घूमने या कार खरीदने जैसे खर्च को पूरा करने के लिए आसानी से पैसे जुटाए जा सकते हैं। इसमें इन्वेस्टेड अमाउंट और इंटरेस्ट, दोनों मेच्योरिटी पूरा होने पर ही मिलता है। (फाइल फोटो)
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फिक्स्ड डिपॉजिट पोस्ट ऑफिस और बैंक में किया जा सकता है। इसके लिए कुछ जरूरी दस्तावेजों के साथ बैंक या पोस्ट ऑफिस के ब्रांच में जाकर अकाउंट खोला जा सकता है। यह अकाउंट ऑनलाइन भी खोला जा सकता है। कुछ बैंकों ने इसके लिए ऐप भी डेवलप किए हैं, जिनके जरिए घर बैठे अकाउंट खोला जा सकता है। (फाइल फोटो)
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फिक्स्ड डिपॉजिट अकाउंट और रिकरिंग अकाउंट, दोनों में रिटर्न पर उसकी अवधि का असर पड़ता है। अगर लंबी अवधि के लिए निवेश किया जाएगा. तो जाहिर है कि रिटर्न ज्यादा मिलेगा। निवेश की अवधि कम होने पर उसी के हिसाब से रिटर्न में मिलने वाली रकम घट जाएगी। इसलिए हर ऑफर के टेन्योर ऑप्शन्स को समझना जरूरी होता है। आमतौर पर फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) का टेन्योर 7 दिन से 10 साल तक और रिकरिंग डिपॉजिट (RD) का टेन्योर 6 महीने से 10 साल तक का होता है। (फाइल फोटो)
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बैंक और पोस्ट ऑफिस में कोई भी अकाउंट खुलवाने के लिए मिनिमम अमाउंट तय है। फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) और रिकरिंग डिपॉजिट (RD), दोनों के लिए मिनिमम इन्वेस्टमेंट अमाउंट अलग-अलग बैंक में अलग-अलग होता है। कम से कम 1,000 से 5,000 रुपए से फिक्स्ड डिपॉजिट खाता खोला जा सकता है। वहीं, रिकरिंग डिपॉजिट खाता कम राशि से भी खोला जा सकता है। इसमें समय-समय पर बदलाव भी होते रहते हैं। (फाइल फोटो)
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फिक्स्ड डिपॉजिट और रिकरिंग डिपॉजिट खातों में इंटरेस्ट रेट उनकी अवधि पर आधारित होते हैं। फिक्स्ड डिपॉजिट में इंटरेस्ट रेट 2.35 से सेकर 10 फीसदी तक भी हो सकता है। वहीं, रिकरिंग डिपॉजिट अकाउंट में इंटरेस्ट रेट 4 से 8 फीसदी तक होता है। सीनियर सिटिजन्स के लिए इंटरेस्ट रेट थोड़ा ज्यादा, आम तौर पर 25-50 बेसिस पॉइंट्स अधिक होता है। फिक्स्ड डिपॉजिट का इंटरेस्ट समय-समय पर या टर्म पूरा होने के बाद में मिलता है। वहीं, रिकरिंग डिपॉजिट का इंटरेस्ट टेन्योर के अंत में प्रिंसिपल अमाउंट के साथ मिलता है। (फाइल फोटो)

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